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मानसून सत्र : विपक्ष का बहिष्कार, प्रथम अनुपूरक पास, वित्त मंत्री ने कहा हमारा वित्तीय प्रबंधन बहुत मजबूत, पैसे की कोई कमी नहीं

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द फॉलोअप डेस्क
सोमवार को विपक्ष के बहिष्कार के बीच 4296 करोड़ रुपए का प्रथम अनुपूरक बजट विधानसभा से पास हो गया। विपक्ष के बहिष्कार के कारण सत्ता पक्ष को पूरा गोल पोस्ट खाली मिला। केवल जदयू विधायक सरयू राय ही विपक्षी सदस्य के रूप में सदन में उपस्थित रहे। उन्होंने एक-दो सवाल खड़ा किया। वित्त मंत्री और सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। सरयू राय का कहना था कि वित्त विभाग का मूल बजट 342 करोड़ रुपए का है। प्रथम अनुपूरक में 835 करोड़ रुपए का प्रावधान किए गए हैं। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग का मूल बजट 1381 करोड़ रुपए का है जबकि प्रथम अनुपूरक में उसके लिए 448 करोड़ रुपए का प्रावधान क्यों करना पड़ा। उनके कहने का मूलभाव यही था कि मूल से सूद कहीं अधिक है। इसके अलावा राज्य सरकार प्रथम अनुपूरक बजट में राशि की मांग करने के बदले आकस्मिकता निधि में जमा करोड़ों की राशि खर्च क्यों नहीं करती। सरकार वित्तीय अनुशासन की बात करती है, लेकिन विभिन्न विभागों, प्रमंडलों, जिलों से लेकर प्रखंड तक एक बड़ी राशि जमा है। उसका उपयोग नहीं हुआ है।

मंईयां सम्मान योजना फ्री बी नहीं
सरकार के जवाब में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार का वित्तीय प्रबंधन बहुत मजबूत है। इसी का परिणाम है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के साढ़े चार महीने में हम पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन फीसदी अधिक राशि खर्च की है। इसी तरह इसी अवधि में हमने राजस्व संग्रहण में भी इजाफा किया है। उन्होंने बताया कि 2010-11 से पीएल खाते में लगभग 22 हजार करोड़ की राशि जमा थी। उसमें से सरकार ने लगभग चार हजार करोड़ राजकोष में जमा कराया। किशोर ने बार बार दुहराया कि गरीबों के चेहरे पर खुशी लाने के लिए सरकार कृत संकल्प है। मंईयां सम्मान योजना फ्री बी नहीं है। यह महिलाओं का सम्मान है। इस राशि से महिलाएं सुखी, संपन्न और मजबूत हो रही है। उन्होंने बार बार दुहराया कि मंईयां सम्मान योजना या राज्य संपोषित योजनाओं के लिए राशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि आरबीआई, योजना आयोग के निदेशों व अन्य शर्तों के अनुसार 18000 करोड़ तक बाजार से उधार ले सकते हैं। लेकिन हमारी वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत है कि हम न उधार लिए हैं और ऋण। उन्होंने केंद्र पर पैसे देने में भेदभाव का भी आरोप लगाया। कहा कि अब तक अनुदान की 70 फीसदी राशि ही मिली है। केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी समय पर नहीं मिल रही है। अगर केंद्र सरकार का सहयोग मिले तो हेमंत सरकार झारखंड को विकास के उच्च पायदान पर लाने में सक्षम हैं।


अति वृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए सरकार कर सकती है विशेष घोषणा
राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि मानसून सत्र किसानों को समर्पित होगा। अति वृष्टि से भदई और तेलहन फसलों को भारी नुकसान हुआ है। राज्य में अब तक जहां औसतन 700 मिलीमीटर बारिश होती थी, अब तक 950 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। कल सदन में अति वृष्टि पर दो घंटे की चर्चा होगी। उम्मीद की जा रही है कि कल चर्चा के बाद राज्य सरकार अति वृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए विशेष सहायता की घोषणा कर सकती है।

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