बोकारो
झारखंड की पहचान और आदिवासी समाज की आवाज़ रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विचार और उनके संघर्ष को याद करने के लिए बुधवार को बी.एस.सिटी के कैंप टू स्थित जायका हैपनिंग्स सभागार में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला प्रशासन और समाज के विभिन्न वर्गों ने मिलकर उनके योगदान को याद किया और उनके विकास मॉडल को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध लेखक और चिंतक अनुज कुमार सिन्हा, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अभय सागर मिंज और जिला उपायुक्त अजय नाथ झा मौजूद थे। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल ढ़ांडा, डीसीएलआर प्रभाष दत्ता और बेरमो के एसडीओ मुकेश मछुआ सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

गुरुजी के विचार और संघर्ष पर चर्चा
मुख्य अतिथि अनुज कुमार सिन्हा ने कहा कि शिबू सोरेन जाति और धर्म से ऊपर उठकर सभी वर्गों को साथ लेकर चलते थे। उन्होंने अपने पिता की हत्या के पीछे छिपे शोषण को समझा और महाजनी प्रथा को जड़ से खत्म करने का साहसिक संकल्प लिया। यह उनके अदम्य संघर्ष का परिणाम था कि आदिवासी समाज इस कुप्रथा से मुक्त हो सका।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अभय सागर मिंज ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल जंगल और नृत्य तक सीमित समझना गलत है। दिशोम गुरु ने यह सोच बदलने का काम किया। उन्होंने 19 सूत्री विकास मॉडल की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य आदिवासी समाज का समग्र विकास था। उन्होंने सांस्कृतिक चेतना और आत्मपहचान पर बल दिया।

उपायुक्त ने किया बड़ा ऐलान
उपायुक्त अजय नाथ झा ने अपने संबोधन में कहा कि दिशोम गुरु ने शिक्षा, नशामुक्ति और समाज सुधार को अपनी प्राथमिकता बनाई थी। उनकी स्मृति को जीवित रखने के लिए बोकारो जिले के सभी पंचायतों में रात्रि पाठशाला चलाई जाएगी, ताकि मजदूर, किसान और बुजुर्ग भी शिक्षा ग्रहण कर सकें। इसके साथ ही जिले में 24×7 पुस्तकालय की व्यवस्था की जाएगी, जहां बच्चे और विद्यार्थी रात-दिन पढ़ाई कर सकेंगे।
उपायुक्त ने यह भी बताया कि जिले में व्यापक स्तर पर नशामुक्ति अभियान चलाया जाएगा, जिसमें समाज के लोग और प्रशासन मिलकर काम करेंगे। वहीं, गुरुजी की कर्मस्थली ललपनिया पंचायत के लुगुबुरू घंटाबाड़ी में कार्तिक पूर्णिमा से पूर्व उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
श्रद्धांजलि और संकल्प
कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। उपस्थित अतिथियों और अधिकारियों ने उनके योगदान को नमन किया और उनके विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
संगोष्ठी का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि दिशोम गुरु का जीवन, विचार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
