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मानसून सत्र : अब विश्वविद्यालयों के कुलपति की नियुक्ति राज्य सरकार करेगी, उच्च शिक्षा मंत्री होंगे प्रति कुलपति

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सदन से झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पास हो गया। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू द्वारा सदन में पेश यह विधेयक विपक्ष के मामूली विरोध के बीच ध्वनि मत से पास हुआ। भाजपा विधायक नवीन जायसवाल का कहना था कि विश्वविद्यालय विधेयक राजनीति से प्रेरित है। राज्य सरकार शिक्षा का राजनीतिकरण करना चाहती है। गवर्नर का पावर सीज करने का प्रयास कर रही है। उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि गुजरात में 2014 से इस तरह का अधिनियम लागू है। गुजरात में 11 वर्षों से लागू इस कानून का वे क्यों नहीं विरोध कर रहे। उन्होंने कहा कि राज्य के उच्च शिक्षा व्यवस्था में समरुपता और पारदर्शिता लाना इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है। विधेयक में किए गए प्रावधान के मुताबिक अब झारखंड के राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति होंगे। कुलपति की नियुक्ति अब राज्यपाल की जगह राज्य सरकार द्वारा यूजीसी द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंड के अनुसार राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।


इस तरह होगी कुलपति की नियुक्ति
कुलपति की नियुक्ति के लिए एक चयन समिति का गठन किया जाएगा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव, प्रधान सचिव या सचिव इस समिति के अध्यक्ष होंगे। उच्च राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त संस्था या विश्वविद्यालय के निदेशक या प्रमुख समिति के सदस्य होंगे। इसके अलावा यूजीसी का प्रतिनिधि और कुलाधिपति द्वारा नामित प्रतिनिधि भी चयन समिति के सदस्य होंगे। संबंधित विश्वविद्यालय का कुलसचिव चयन समिति के सदस्य होंगे। समिति में नामित किए गए सदस्य, वैसे व्यक्ति होंगे जो कबी भी संबंधित विश्वविद्यालय अथवा उस विश्वविद्यालय के किसी महाविद्यालय अथवा किसी मान्यता प्राप्त संस्था से संबंधित नहीं रहे होंगे। मताधिकार प्राप्त न्यूनतम तीन सदस्यों की उपस्थिति के बिना चयन समिति की बैठक नहीं होगी। चयन समिति राज्य सरकार को तीन से पांच नामों की अनुशंसा करेगी। बंद लिफाफे में अनुशंसित व्यक्तियों के नाम वर्णमाला क्रम में होगा। प्रत्येक व्यक्ति की उपयुक्तता पर एक विस्तृत विवरण भी संलग्न किया जाएगा। नामों का पैनल तैयार करते समय अगर समिति के सदस्यों के बीच मतैक्य नहीं रहा तो समिति के अध्यक्ष को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा। यदि राज्य सरकार अनुशंसित व्यक्तियों में से किसी को भी अनुमोदित नहीं करती है तो वह फिर से समिति को पैनल भेजने का निर्देश दे सकती है। कुलपति के चयन की प्रक्रिया रिक्ति से छह माह पूर्व प्रारंभ की जाएगी। कुलपति का कार्यकाल संतोषप्रद प्रदर्शन और अधिकतम 70 वर्ष की उम्र सीमा तक होगी।

विवि सेवा आयोग के माध्यम से होगी नियुक्ति
विश्वविद्यालयों के विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन किया जाएगा। इसका मुख्यालय रांची होगा। उच्च शिक्षा विभाग इस आयोग का नोडल प्रशासनिक विभाग होगा। सचिवालयी सहयोग देगा। आयोग में अध्यक्ष, सदस्य प्रशासन तथा तीन अन्य सदस्य होंगे।  ये पूर्णकालिक होंगे। इनकी नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। प्रधान सचिव या केंद्र सरकार में अपर सचिव अथवा अखिल भारतीय सेवाओं अथवा ग्रुप ए सेवा के समतुल्य वेतनमान  में सेवानिवृत अधिकारी अध्यक्ष पद के पात्र होंगे। इसके अलावा किसी सार्वजनिक विश्वविद्यालय के कुलपति अथवा भारत सरकार के अधिनियन द्वारा स्थापित किसी संस्थान के निदेशक के रूप में कम से कम तीन वर्षों की सेवा करने वाले अधिकारी भी आयोग के अध्यक्ष पद के पात्र होंगे।


इनकी नियुक्ति करेगा विवि सेवा आयोग
विश्वविद्यालय के अधिकारियों, अध्यापकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों तथा अंगीभूत महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों की प्रत्यक्ष विधि से नियुक्ति के लिए दिशा निर्देश तैयार करेगा। इनकी नियुक्ति करेगा। विश्वविद्यालय प्रत्येक वर्ष जनवरी तक राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित रोस्टर के अनुसार रिक्त पदों के विरुद्ध अधिकारियों, अध्यापकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों तथा अधीनस्थ महाविद्यालयों के प्राचार्याों के चयन  हेतु आयोग को आवश्यकता पत्र प्रेषित करेगा।

विधेयक में कई और भी प्रावधान
प्रवेश, परीक्षा, मूल्यांकन तथा छात्रों से संबंधित मामलों के विवाद का प्रावधान किया गया है
प्रवेश संबंधी विवाद का निपटारा छात्र शिकायत निवारण समिति द्वारा किया जाएगा
विश्वविद्यालय किसी परीक्षा के अंतिम पत्र के 30दिनों के भीतर परीक्षाफल का प्रकाशन करेगा
विश्वविद्यालयों में कर्मचारी शिकायत निवारण समिति, छात्र शिकायत निवारण समिति होगी
कर्मचारी शिकायत निवारण न्यायाधिकरण होगा, उच्च न्यायालय के सेवानिवृत जज इसके अध्यक्ष होंगे
विश्वविद्यालयों में अनुसंधान, नवाचार, संवर्धन, उद्योग संपर्क एवं उद्यमिता बोर्ड,सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड, छात्र मामलों के बोर्ड, खेलकूद शारीरिक शिक्षा बोर्ड, मानव संसाधन बोर्ड, इंटर्नशिप, अप्रेंटिस एवं प्लेसमेंट बोर्ड, समावेशी शिक्षा बोर्ड, संपदा एवं सुविधा प्रबंधन बोर्ड, अंगीभूत महाविद्यालय बोर्ड, संबद्ध महाविद्यालय बोर्ड, अध्ययन केंद्र बोर्ड, क्षेत्रीय केंद्र बोर्ड, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क बोर्ड, छात्र कला संस्कृति बोर्ड होंगे। 


 

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