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JSSC : छह साल से नहीं मिला नियमित अध्यक्ष, दो महीने से सदस्य का पद भी खाली

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द फॉलोअप, रांची
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) पिछले कुछ वर्षों से लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा को लेकर विवाद में आता रहा है। 11 अप्रैल को भी जेएसएससी उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर विवाद में आया। प्रश्न पत्र लीक होने का आरोप लगा। 159 अभ्यर्थी और सॉल्वर गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार किए गए। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक प्रकरण के बाद फरवरी 2020 में इसके तत्कालीन अध्यक्ष नीरज सिन्हा ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। सरकार ने बगैर देर किए वित्त सचिव प्रशांत कुमार को जेएसएससी के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। उस समय से जेएसएससी को अब तक नियमित अध्यक्ष नहीं मिल सका। सरकार अतिरिक्त प्रभार के माध्यम से ही जेएसएससी को खींचता चला जा रहा है। उस स्थिति में जब जेएसएससी में प्रतियोगिता परीक्षा के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन की चुनौतियां बढ़ती ही जा रही है। नीम पर करैला वाली स्थिति यह भी है कि जेएसएससी में अध्यक्ष के अलावा सदस्य के दो पद हैं। एक पद पर रिटायर आईएएस अधिकारी मोती जॉर्ज लकड़ा पदस्थापित हैं। जबकि दूसरे सदस्य प्रताप चंद्र किचिंगिया का कार्यकाल लगभग दो माह पूर्व ही पूरा हो चुका है। इस तरह जेएसएससी प्रभारी अध्यक्ष और एक सदस्य के हवाले है। 


यहां मालूम हो कि प्रशांत कुमार का मूल पदस्थापन वित्त सचिव के पद पर है। इसके अतिरिक्त उन्हें जल संसाधन सचिव का भी अतिरिक्त प्रभार है। साथ ही जेएसएससी के चेयरमैन का भी अतिरिक्त प्रभार है। बोकारो, हजारीबाग व अन्य जिलों में हुए ट्रेजरी घोटाले के बाद वित्त विभाग की जिम्मेदारी कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है। जल संसाधन विभाग भी झारखंड का एक बड़ा विभाग है। जानकारों का कहना है कि सरकार की मंशा अगर साफ है तो जेएसएससी के अध्यक्ष पद पर किसी तेज तर्रार आईएएस या व्यक्ति को पदस्थापित किया जाना समय की मांग है। क्योंकि जेएसएससी पर लोड काफी बढ़ गया है। लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में विवादित होने के कारण झारखंड की बदनामी भी बढ़तीत जा रही है। यहां मालूम हो कि रिटायर आईएएस अधिकारी डॉ मेरी नीलिमा केरकेट्टा का कार्यकाल पूरा होने के बाद जेपीएससी की भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी। महीनों तक जेपीएससी के चेयरमैन का पद रिक्त रहा था। इस कारण प्रतियोगी परीक्षाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।

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