द फॉलोअप डेस्क, रांची:
राजमहल से झामुमो सांसद विजय हांसदा ने कहा कि खान-खनिज संशोधन बिल और को-ऑपरेटिव संशोधन बिल के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों की राह का रोड़ा हटा रही है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा समेत वन संरक्षण कानूनों को दरकिनार करके केंद्र सरकार, खनिज संसाधनों को पूरी तरह से पूंजीपतियों को सौंप देने की तैयारी में है। विजय हांसदा ने कहा कि झारखंड इसका पुरजोर विरोध करेगा। विजय हांसदा ने कहा कि खनिज संपदा से परिपूर्ण झारखंड के संसाधनों का लाभ यहां के आदिवासी-मूलवासी को मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
विजय हांसदा ने कहा कि यदि झारखंड, खनिज संसाधनों पर सेस नहीं लगा सकेगा तो कल्याणकारी योजनाओं का संचालन कैसे होगा? विजय हांसदा ने कहा कि ये सरासर अन्याय है।

जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर संकट
सांसद विजय हांसदा ने कहा कि खनिज संसाधनों पर सेस लगाने से जो राजस्व मिलता है, उसका इस्तेमाल झारखंड में सर्वजन पेंशन योजना, आबुआ आवास योजना और मंईयां सम्मान योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन में किया जा रहा था। राज्य सरकार, केंद्रांश के अलावा सेस लगाने से मिले राजस्व से अपने स्तर पर बहुत सारी योजनाओं का संचालन करती है। ग्रीन कार्ड योजना इसमें शामिल है, लेकिन यदि सेस लगाने का अधिकार छीन लिया जाएगा तो बहुत सारी योजनाओं को बंद करना पड़ेगा।

आदिवासी-मूलवासी की जमीनों पर जबरन कब्जा
विजय हांसदा ने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में जबरन आदिवासी-मूलवासी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है। लोगों का विस्थापन हो रहा है। जल, जंगल और जमीन का संरक्षण करने वाले कानूनों को कमजोर करके पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। विजय हांसदा ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा संसद से पास 2 कानूनों का विरोध करेगा। झारखंड का हक नहीं छीनने दिया जाएगा।