द फॉलोअप, रांची:
प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार से राज्य में डिप्टी कलेक्टर के 207 और डीएसपी के 35 पद एक झटके में खाली हो गया। वैसे डिप्टी कलेक्टर के कुल रिक्त हुए पदों की संख्या लगभग 450 हो गयी है। इससे नीचले स्तर पर सरकार के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने की गंभीर चुनौती आ खड़ी हुई है। आंकड़े के अनुसार राज्य प्रशासनिक सेवा के सृजित पदों की कुल संख्या लगभग 1450 है। इनमें बेसिक ग्रेड (डिप्टी कलेक्टर) के लगभग 850 पद हैं। इनमें लगभग 250 पद पहले से रिक्त थे। अब 11 वीं से 13 वीं जेपीएससी से उत्तीर्ण 207 और पद रिक्त हो गए। इस तरह बेसिक ग्रेड के लगभग 450 पद रिक्त हो गए हैं। इसी तरह डीएसपी के भी 35 पद रिक्त हुए हैं।
नई नियुक्तियों में न्यूनतम 1 साल का वक्त लगेगा
जानकारों का मानना है कि जेपीएससी द्वारा अब नयी नियुक्ति किए जाने में कम से कम एक साल का और समय लगेगा। इस तरह राज्य सरकार के लिए अगले एक साल तक प्रखंड, अंचल और अन्य कार्यालयों में बेसिक ग्रेड के अधिकारियों की भारी कमी रहेगी। इतना ही नहीं विभिन्न सचिवालयों में सीजीएल से सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और कनीय सचिवालय सहायक के पद पर नियुक्त हुए 1135 कर्मी हट गए हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव सचिवालयी व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है।

नौकरी से हटाए गए 207 अधिकारी अभी ट्रेनिंग पर थे
11 वीं से 13 वीं जेपीएससी से डिप्टी कलेक्टर रैंक के 207 अधिकारी चयनित हुए थे। अक्तूबर 2025 में इनकी ज्वाइनिंग के बाद एटीआई में ट्रेनिंग दी गयी। इसके बाद मार्च 2026 में इन्हें फील्ड ट्रेनिंग के लिए विभिन्न जिलों में पदस्थापित किया गया। जिला स्तर पर प्रभारी व्यवस्था के तहत उपायुक्तों द्वारा इन्हें किसी किसी प्रखंड और अंचल की भी जिम्मेदारी दी गयी है। इसके अलावा श्रावणी मेला में भी दर्जनों अधिकारियों को विधि व्यवस्था के लिए तैनात किया गया है।
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प्रोन्नति के बाद भी कनीय पद पर बनाए रखने की मजबूरी
बेसिक ग्रेड के अधिकारियों की भारी कमी की वजह से राज्य सरकार के लिए इन्हें प्रोन्नति के बाद भी प्रोन्नत पद पर पदस्थापन करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार राज्य प्रशासनिक सेवा के दर्जनों ऐसे अधिकारी हैं जो बेसिक ग्रेड से एसडीएम रैंक में प्रोन्नत हो चुके हैं। लेकिन उन्हें एसडीएम रैंक में पदस्थापित नहीं किया जा रहा है। क्योंकि नीचले स्तर पर बेसिक ग्रेड के लिए कर्णांकित बीडीओ, सीओ, कार्यपालक दंडाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण और प्रभावी पद रिक्त हो जाएगा। जबकि नीचले स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने की महती जिम्मेदारी इन्हीं के ऊपर है।

अधिकारियों की कमी की वजह से मात्र 164 प्रखंड और अंचलों में है हीं बीडीओ और सीओ
मालूम हो कि पिछले दिनों बेसिक ग्रेड के अधिकारियों की कमी की वजह से ही राज्य सरकार ने कुल 271 प्रखंड और अंचलों में केवल 164 प्रखंड/अंचलों में BDO और CO दोनों रैंक के अधिकारियों को पदस्थापित करने का निर्णय लिया था। जबकि 107 प्रखंड और अंचलों में केवल एक ही अधिकारी पदस्थापित करने का फैसला किया गया है। इससे उस प्रखंड और अंचल में बीडीओ ही सीओ का और सीओ ही बीडीओ का भी काम देख रहे हैं। इस फैसले के तहत 54 प्रखंडों में केवल BDO ही CO का काम देख रहे हैं जबकि 53 अंचलों के सीओ को ही बीडीओ का भी प्रभार दिया गया है।
सचिवालयों में अधिकारियों की हुई भारी कमी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 30 दिसंबर 2025 को रांची के मोरहाबादी मैदान में JSSC-CGL से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपा था। उस दिन मुख्यमंत्री ने 1932 चयनित अभ्यर्थियों में 1927 को नियुक्ति पत्र सौंपा था। इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के 847, कनीय सचिवालय सहायक के 288, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के 170, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के 191, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के 249, अंचल निरीक्षक के 178 और प्लानिंग असिस्टेंट के चार अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिला था। इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और कनीय सचिवालय सहायक के 1135 अधिकारी विभिन्न सचिवालयों में पदस्थापित थे।
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