जामताड़ा
झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सावन माह के पावन अवसर पर मिहिजाम से सुल्तानगंज जा रहे कांवरियों के एक विशाल जत्थे को रवाना किया। परंपरा के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी मंत्री डॉ. अंसारी स्वयं श्रद्धालुओं के साथ पैदल यात्रा में शामिल हुए, जिससे माहौल में उत्साह और श्रद्धा की अनोखी छटा देखने को मिली।
सड़कों पर गूंजते "बोल बम" के नारों के बीच जब मंत्री जी कांवरियों के साथ कदम से कदम मिलाते हुए चल रहे थे, तब आमजन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। लोगों ने एक स्वर में कहा कि “डॉ. अंसारी केवल मंत्री नहीं, बल्कि हर धर्म और समाज के सच्चे प्रतिनिधि हैं।”
डॉ. अंसारी का यह gesture सामाजिक सौहार्द और सर्वधर्म सम्मान का एक बेहतरीन उदाहरण माना गया। जैसे मुस्लिम समाज के नेता हज यात्रियों को मक्का रवाना करते हैं, उसी भावना से कांवरियों को विदा कर उन्होंने यह संदेश दिया कि सच्ची राजनीति धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत की सेवा है।

जनता के बीच यह चर्चा भी रही कि चूंकि डॉ. अंसारी का जन्म स्वयं देवघर, यानी बाबा बैद्यनाथ की नगरी में हुआ है, इसलिए उनके मन में बाबा के प्रति विशेष श्रद्धा है। हर वर्ष सावन में उनकी उपस्थिति यही दर्शाती है कि वे न केवल एक जनप्रतिनिधि, बल्कि श्रद्धा से जुड़े एक भावनात्मक सूत्रधार भी हैं।
कार्यक्रम में मंत्री डॉ. अंसारी ने कहा, “मैं किसी एक मजहब का नहीं, झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता का सेवक हूँ। धर्म नहीं, इंसानियत मेरी पहचान है। बाबा से मेरी प्रार्थना है कि हर झारखंडवासी निरोग और सुखी रहे।”
इस अवसर पर कांवरियों के लिए निःशुल्क दवाएं, प्राथमिक चिकित्सा और अन्य व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गईं, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा में सहूलियत मिल सके।

जनता ने यह भी कहा कि चाहे सोहराय हो या सरहुल, रमज़ान हो या दुर्गा पूजा, ईद हो या सावन- डॉ. अंसारी हर पर्व में लोगों के बीच रहकर सेवा करते हैं। यही कारण है कि वे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के दिलों में बसने वाले जनसेवक बन चुके हैं। इस पूरे आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि राजनीति केवल सत्ता की नहीं, सेवा, समर्पण और समभाव की भी कहानी हो सकती है।
