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महागामा के सारोतिया में आधार सेंटर का शुभारंभ, राज्य की 4,345 पंचायतों तक सेवा पहुंचाने की तैयारी

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महागामा:

गांव के लोगों को आधार से जुड़ी छोटी-छोटी सेवाओं के लिए अब प्रखंड और जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। ग्रामीणों की इसी परेशानी को दूर करने की दिशा में झारखंड सरकार ने कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मंगलवार को महागामा प्रखंड के सारोतिया पंचायत सचिवालय में आधार परमानेंट एनरोलमेंट सेंटर का शुभारंभ किया। सारोतिया पंचायत में शुरू हुआ यह सेंटर ग्रामीणों के लिए महज एक नई सुविधा नहीं, बल्कि डिजिटल सेवाओं को गांव की चौखट तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार की योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से झारखंड की सभी 4,345 ग्राम पंचायतों में आधार एनरोलमेंट सेंटर स्थापित किए जाने की तैयारी है।

 

पंचायत स्तर पर सेंटर खुलने से बड़ी राहत
उद्घाटन के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पहले आधार में नाम, जन्मतिथि, पता या अन्य जानकारी में सुधार कराने के लिए ग्रामीणों को दूर-दराज के इलाकों से प्रखंड या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था। कई बार लंबी दूरी तय करने के बाद भी काम नहीं हो पाने से लोगों को दोबारा चक्कर लगाना पड़ता था। पंचायत स्तर पर सेंटर खुलने से अब इस परेशानी से काफी हद तक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल पंचायत की परिकल्पना का उद्देश्य केवल आधार सेवा उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि पंचायत भवनों को ग्रामीणों के लिए सुविधाओं का केंद्र बनाना है। आने वाले समय में आधार सेवाओं के साथ बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अन्य नागरिक सुविधाओं को भी पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

गांव और पंचायत विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे
मंत्री ने कहा कि 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में हुए एमओयू के बाद पंचायत स्तर पर आधार सेवाओं के विस्तार की दिशा में यह पहल आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत राजधानी या बड़े शहर से नहीं, बल्कि पंचायत भवन से होना इस बात का संकेत है कि सरकार गांवों और पंचायतों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दे रही है।

सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों तक लोगों को मिलेगा लाभ
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि इस पहल का सीधा लाभ महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलेगा। छोटी-छोटी सरकारी और डिजिटल सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी, जिससे ग्रामीणों के समय और आर्थिक संसाधनों दोनों की बचत होगी। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, वीएलई और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि सेंटर का संचालन पारदर्शी और सुचारु तरीके से किया जाए, ताकि ग्रामीणों को बिना किसी परेशानी के समय पर सेवा मिल सके।

पंचायतें जनसेवा केंद्र के रूप में होगी विकसित
मंत्री ने कहा कि सरकार पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और जनसेवा के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। पंचायतों में ज्ञान केंद्र के माध्यम से बच्चों के लिए डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि गांव के लोगों की अधिक से अधिक समस्याओं का समाधान गांव में ही हो। उन्होंने कहा कि पंचायतों को उनके हिस्से का फंड उपलब्ध कराने पर भी सरकार ने काम किया है। 15वें वित्त आयोग की लंबित राशि को केंद्र से प्राप्त कर पंचायतों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

सारोतिया पंचायत से शुरू हुई आधार सेवा को इसी व्यापक डिजिटल पंचायत अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि राज्य की सभी 4,345 पंचायतों तक यह सुविधा पहुंचती है, तो ग्रामीणों के लिए आधार और अन्य डिजिटल सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो सकती है।

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