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चैंबर प्रतिनिधियों ने सीएम से गिरिडीह में जाम और नो इंट्री से निजात दिलाने तथा उद्योगों को पानी उपलब्ध कराने की मांग की

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द फॉलोअप डेस्क
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चेंबर ऑफ कॉमर्स एवं इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों के साथ आज बैठक की। इस दौरान कई महत्वपूर्ण मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गईं। बैठक में फेडरेशन के कोयलांचल क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अमरजीत सिंह सलूजा ने गिरिडीह और कोयलांचल क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया है।


शहर को जाम से राहत और बाईपास निर्माण की मांग
बैठक में सबसे पहले गिरिडीह शहर में लगातार बढ़ रही ट्रैफिक जाम की समस्या का मुद्दा उठाया गया। बताया गया कि संकरी सड़कें, अतिक्रमण और उचित ट्रैफिक व्यवस्था नहीं होने के कारण आम लोगों, व्यापारियों और बाहर से आने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। इसके अलावा न्यू गिरिडीह रेलवे साइडिंग से औद्योगिक इकाइयों तक कच्चे माल की ढुलाई में दिनभर नो-एंट्री के कारण बाधा आती है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान के लिए बाईपास सड़क के निर्माण की मांग की गई।
उद्योगों के लिए जलापूर्ति और मलयपुर बांध परियोजना पर जोर
उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा गया कि भूजल के उपयोग पर रोक के कारण उद्योगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में वर्षों से लंबित मलयपुर (बलखाडीह) बांध परियोजना का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग रखी गई, ताकि उद्योगों के साथ-साथ लोगों को भी पेयजल और सिंचाई की सुविधा मिल सके। साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र दिलाने के लिए केंद्र सरकार से पहल करने का अनुरोध किया गया।


ट्रेन सेवा बहाल करने और नई रेल परियोजना में तेजी लाने की मांग
बैठक में गिरिडीह से कोलकाता और पटना के लिए बंद पड़ी ट्रेन सेवा को फिर से शुरू करने की मांग भी उठाई गई। कहा गया कि ट्रेन सेवा बंद होने से व्यापार, उद्योग और मरीजों को इलाज के लिए आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। इसके अलावा पारसनाथ–मधुबन–सरायगढ़ होते हुए न्यू गिरिडीह तक प्रस्तावित रेल परियोजना के लिए झारखंड सरकार से जल्द राशि उपलब्ध कराने की मांग की गई, ताकि भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो सके। इससे संथाल परगना, गिरिडीह, बोकारो और रांची के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा लोगों के समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

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