द फॉलोअप, रांची
राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने योग्य मतदाताओं से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा लेने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि आज से बीएलओ घर घर जाकर मतदाताओं से इन्युमरेशन फॉर्म भरवाएंगे। छुटे हुए मतदाता सक्रिय होकर अपना फॉर्म भरें और एसआईआर में सहयोग करें। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 82.10 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। लेकिन 47 लाख मतदाताओं की मैपिंक अभी भी शेष है। आयोग ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। के रवि कुमार आज मीडिया कर्मियों से एसआईआर और इम्युरेशन पर बातचीत कर रहे थे।
रवि कुमार ने कहा कि अगर कोई मतदाता झारखंड से बाहर रह रहा है तो उसके परिवार का सदस्य फॉर्म पर सिग्नेचर करके नाम जुड़वा सकता है। इस काम में लगभग 31 हजार बीएलओ को लगाया गया है। इसके अलावा राजनीतिक दलों के बीएलए-टू भी मिल कर सहयोग दे सकते हैं। राजनीतिक दलों ने अब तक लगभग 74 हजार बीएलए नियुक्त किए हैं। बीएलओ जब घर घर जाएंगे, उस दौरान नए मतदाता भी अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं। नये मतदाताओं के लिए प्रत्येक बीएलओ को 30-30 फॉर्म दिए गए हैं। यहां मालूम हो कि बीएलओ 30 जून से 29 जुलाई तक घर घर जाएंगे। पांच अगस्त तक मतदाता सूची के प्रारूप का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा। पांच अगस्त से तीन अक्तूबर तक दावा और आपत्तियां दर्ज कराया जा सकेगा। फिर 4 सितंबर तक दावा और आपत्तियों का अंतिम निराकरण किया जाएगा।
शहर पर भारी पड़ रहे ग्रामीण
मैपिंग में शहरों की अपेक्षा ग्रामीण मतदाता ज्यादा जागरुक हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी रांची के रांची, हटिया और कांके जैसे विधानसभा क्षेत्रों के 55 फीसदी मतदाताओं का ही मैपिंग हो सका है। जबकि माड़, मांडर और सिल्ली जैसे ग्रामीण इलाकों के विधानसभा क्षेत्र के 85 फीसदी मतदाताओं का मैपिंक हो गया है।
बीएलओ घर जाएंगे तो क्या करना है
बीएलओ प्रत्येक मतदाता को पूर्व में भरा हुआ इन्युमरेशन फॉर्म की दो प्रति देगा। इसमें संबंधित मतदाताओं की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। मसलन नाम, पता, इपिक नंबर, आयु, लिंग, पिता या पति का नाम और मोबाइल नंबर। फॉर्म की एक प्रति मतदाता अपने पास रख लेंगे जबकि दूसरी प्रति सिग्नेचर करने के बाद बीएलओ को लौटा देंगे। सिग्नेचर करने से पहले उसमें दर्ज जानकारी को चेक करेंगे। यदि कोई मतदाता फॉर्म पर हस्ताक्षर किए बिना वापस करता है, तो उसे अमान्य माना जाएगा। गलत जानकारी या फर्जी घोषणा-पत्र जमा करने वालों के खिलाफ निर्वाचन आयोग कड़ी कानूनी कार्रवाई भी कर सकेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाताओं को किसी भी प्रकार के दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। मूल दस्तावेज केवल सत्यापन के लिए बीएलओ को दिखाए जा सकते हैं, उन्हें अपने पास रखने की अनुमति नहीं है।
