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मलेरिया का बढ़ता प्रकोप: पूर्वी सिंहभूम में 9वीं मौत, स्वास्थ्य विभाग ने 27 कर्मियों को किया शोकॉज

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पूर्वी सिंहभूम

पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। गालूडीह थाना क्षेत्र के हेंदलजुड़ी पंचायत अंतर्गत केंदडांगा टोला में मलेरिया से 14 वर्षीय छात्रा किरण हांसदा की मौत हो गयी। इसके साथ ही जिले में मलेरिया के कारण हुई मौत की संख्या 9 हो गयी है। किरण हांसदा राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय काकड़ीशोल में कक्षा आठवीं की छात्रा थी। परिजनों के अनुसार, वह धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव में अपने रिश्तेदार के घर रह रही थी। रविवार को उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन उसे लेकर केंदडांगा पहुंचे। सोमवार को हालत ज्यादा गंभीर होने पर उसे घाटशिला स्थित स्वर्णरेखा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां से डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उसे पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले गये, जहां सोमवार रात करीब आठ बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। अस्पताल के दस्तावेजों में मौत का कारण मलेरिया स्पेक्ट्रम दर्ज किया गया है।

29 जून से 14 जुलाई तक कुल 1,30,380 लोगों की मलेरिया जांच

किरण की मौत के बाद केंदडांगा समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल है। घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान रामचंद्र हांसदा, मुखिया मिर्जा हांसदा सहित कई जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी। ग्रामीणों ने क्षेत्र में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था का आरोप लगाते हुए तत्काल विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने और मलेरिया नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जांच और सर्विलांस अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को जिले में 11,362 लोगों की जांच की गयी, जिसमें 83 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाये गये। 29 जून से 14 जुलाई तक जिले में कुल 1,30,380 लोगों की मलेरिया जांच की गयी है। इनमें 2,072 संक्रमित मरीज मिले हैं। मंगलवार को डुमरिया और पोटका में सबसे अधिक 22-22 नये मरीज मिले। इसके अलावा घाटशिला में 10, मुसाबनी में 9, धालभूमगढ़ में 7, सदर अस्पताल क्षेत्र में 7 और पटमदा में 6 नए मामले सामने आये।

लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू

इधर, एमजीएम अस्पताल में फिलहाल आठ मलेरिया मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में जांच, दवा वितरण और जागरूकता अभियान को तेज करने का दावा किया है। वहीं जिले में बढ़ते मलेरिया और डेंगू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने ड्यूटी में लापरवाही और कार्य में उदासीनता बरतने के आरोप में 10 डॉक्टरों समेत 27 स्वास्थ्यकर्मियों को शोकॉज नोटिस जारी किया है। सभी से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सेवा समाप्ति की अनुशंसा की जायेगी। जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई की गयी है, उनमें 10 डॉक्टर, चार एएनएम, तीन लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट, एक जीएनएम, तीन सहायक कर्मचारी, एक होमगार्ड, दो एमपीडब्ल्यू और दो गार्ड शामिल हैं। सभी के खिलाफ एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश भी दिया गया है।

विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण

सिविल सर्जन के निर्देश पर शहर के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान कई डॉक्टर और कर्मचारी अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित मिले। इसके बाद कार्रवाई करते हुए डॉक्टर, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, जीएनएम, सहायक कर्मचारी, होमगार्ड और अन्य कर्मियों को नोटिस जारी किया गया है। सिविल सर्जन ने कहा कि मलेरिया और डेंगू जैसे संक्रमण के समय स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और कर्मचारियों की मौजूदगी बेहद जरूरी है। मरीजों को इलाज में परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्यूटी में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी और दोषी कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

डॉक्टर और कर्मियों की अनुपस्थिति गंभीर मामला

निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाये गये दो डॉक्टरों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की गयी है। शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, हनिफिया और मानगो में कार्यरत डॉक्टर नाजिर अंसारी को प्रशासनिक दृष्टिकोण से अगले आदेश तक सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त किया गया है। वहीं डॉ. आरण तिवारी (शिशु रोग विशेषज्ञ, सदर अस्पताल) को भी अगले आदेश तक सदर अस्पताल में ही कार्य करने का निर्देश दिया गया है। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि जिले में मलेरिया और डेंगू का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और कर्मियों की अनुपस्थिति गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया के फैलाव के पीछे स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। लापरवाही करने वालों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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