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दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी DMD से पीड़ित है 10 साल का संसार, बेड से उठना भी मुश्किल; सरकार से तत्काल मदद चाहिए

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लोहरदगा
कुडू प्रखंड के टाटी गांव का रहने वाला संसार पासवान एक दुलर्भ आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है। 10 वर्षीय संसार DMD यानि ‘ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ नामक बीमारी से जूझ रहा है। परिजनों के अनुसार 14 जनवरी 2026 से संसार की चलने-फिरने की क्षमता लगभग समाप्त हो गई। संसार के माता-पिता का कहना है कि संसार के इलाज में करीब 1 करोड़ से अधिक का खर्च आ रहा है, लेकिन वे इतनी बड़ी राशि जुटाने में असमर्थ हैं। उन्होंने बच्चे की इलाज के लिए सरकार से तत्काल मदद की गुहार लगाई है।

पिछले 6 महिने से बेड पर हैं
संसार के पिता पिता कन्हैया पासवान ड्राइवर हैं, जबकि मां प्रभा देवी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। परिजनों के अनुसार 14 जनवरी 2026 से संसार की चलने-फिरने की क्षमता लगभग समाप्त हो गई। रांची सहित कई जगहों पर इलाज कराने के बावजूद बीमारी की गंभीरता और महंगे उपचार के कारण परिवार अब सरकारी सहायता और समाज के सहयोग की उम्मीद लगाए बैठा है। चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि संसार का प्रभावी इलाज वेल्लोर में संभव है, लेकिन इसके लिए तीन विशेष इंजेक्शन की आवश्यकता होगी।  प्रत्येक की कीमत लगभग 35 लाख रुपये है। इस तरह इलाज पर कुल खर्च एक करोड़ रुपये से अधिक आने का अनुमान है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए संभव नहीं है। प्रभा देवी बताती हैं कि कुछ महीने पहले तक उनका बेटा अन्य बच्चों की तरह खेलता-कूदता था, लेकिन अब वह दूसरों के सहारे भी खड़ा नहीं हो पाता। 

क्या है ‘ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ बीमारी?
ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मुख्य रूप से लड़कों में होने वाली दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें डिस्ट्रोफिन नामक प्रोटीन की कमी से मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में चलने में कठिनाई, बार-बार गिरना, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी और दौड़ने में असमर्थता शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, समय के साथ हृदय और श्वसन की मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. राजू कच्छप ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को आवेदन मिलने पर झारखंड गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। यदि इस बीमारी का उपचार योजना के दायरे में संभव हुआ तो विभाग हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। वहीं उपायुक्त संदीप कुमार मीना ने कहा कि वह सिविल सर्जन से इस मामले में चर्चा करेंगे। सरकार की योजनाओं के तहत जो भी सहायता संभव होगी, बीमार बच्चे को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल संसार और उसका परिवार सरकारी मदद और समाज के सहयोग की उम्मीद में उस दिन का इंतजार कर रहा है, जब उसके चेहरे पर फिर से बचपन की मुस्कान लौट सके।

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