logo

केलाघाघ जलाशय बना रोजगार का केंद्र, जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन पालन से संवर रही जनजातीय परिवारों की जिंदगी

pn.jpg

द फॉलोअप, सिमडेगा:
सिमडेगा जिले के केलाघाघ जलाशय में शुरू किया गया जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन पालन अब ग्रामीण और जनजातीय परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। कभी सिर्फ जल संसाधन के रूप में पहचाने जाने वाला यह जलाशय आज कई परिवारों की आमदनी और आत्मनिर्भरता का आधार बन रहा है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों से स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी सोच के तहत जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग ने केलाघाघ जलाशय में प्रॉन पालन की पहल शुरू की जिसका अब सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है।

प्रतिदिन 1.5 से 2 किलोग्राम तक प्रॉन का उत्पादन 
वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच शुरू की गई इस पायलट परियोजना से जुड़ी मत्स्यजीवी सहयोग समिति के करीब 300 सदस्य सामूहिक रूप से जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन पालन कर रहे हैं। वैज्ञानिक तकनीक प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग से यह पहल धीरे-धीरे सफल आजीविका मॉडल में बदल गई है।

समिति के सक्रिय सदस्य प्रतिदिन 1.5 से 2 किलोग्राम तक प्रॉन का उत्पादन कर रहे हैं। बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण उन्हें ₹600 से ₹1000 प्रति किलोग्राम तक कीमत मिल रही है। इससे कई परिवारों को सालाना ₹2 से ₹3 लाख तक अतिरिक्त आय हो रही है।

रांची, धनबाद और ओडिशा के खरीदार पहुंच रहे 
केलाघाघ का यह मॉडल अब दूसरे जिलों और राज्यों तक भी पहुंच रहा है। सोशल मीडिया पर इस पहल की जानकारी सामने आने के बाद रांची, धनबाद और ओडिशा के सुंदरगढ़, बिरमित्रपुर जैसे क्षेत्रों से खरीदार सीधे यहां पहुंच रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार मिल रहा है और उनकी आमदनी लगातार बढ़ रही है। केलाघाघ जलाशय में प्रॉन पालन की यह पहल दिखाती है कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से ग्रामीण और जनजातीय समुदायों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोले जा सकते हैं।

Tags - Ranchi GreenRanchi SakhuaPlantation EnvironmentalProtection RoshniKhalkho