नेमरा, रामगढ़
झारखंड के शिक्षा मंत्री और झारखंड आंदोलन के पुराने सिपाही रामदास सोरेन के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने एक भावुक ट्वीट के जरिए उन्हें अंतिम विदाई देते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने लिखा, "पहले बाबा दिशोम गुरुजी ने सशरीर हमारा साथ छोड़ा और अब रामदास दा भी हमारे साथ नहीं हैं। यह पल मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है।" उन्होंने कहा कि आज राज्य के बच्चे भी उदास होंगे, क्योंकि उनके प्रिय "रामदास चाचा" अब इस दुनिया में नहीं रहे।

रामदास सोरेन को याद करते हुए सीएम ने लिखा कि झामुमो परिवार के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उन्होंने घाटशिला समेत पूरे झारखंड की जनता के लिए अपना जीवन समर्पित किया था। अलग झारखंड राज्य आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें एक क्रांतिकारी लेकिन भीतर से सौम्य और सरल व्यक्तित्व बताया।
सीएम सोरेन ने लिखा, "शोषित-वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई में वे हमेशा सजग और प्रयत्नशील रहे। वे हमारे बीच भले न हों, लेकिन उनका महान व्यक्तित्व हमेशा राज्यवासियों को प्रेरणा देता रहेगा।"
अंत में मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता को अंतिम जोहार अर्पित करते हुए लिखा, "मरांग बुरु दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान कर शोकाकुल परिवारजनों को दुःख की घड़ी सहने की शक्ति दे। महान आंदोलनकारी रामदास सोरेन अमर रहें! अंतिम जोहार रामदास दा..." रामदास सोरेन के निधन से न केवल झारखंड मुक्ति मोर्चा, बल्कि पूरा झारखंड शोक में डूबा हुआ है। राज्य ने आज अपने एक समर्पित सपूत को खो दिया।
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