सितेश कुमार/हजारीबाग:
हजारीबाग के केबी महिला कॉलेज परिसर में बने आदिवासी बालिका छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। छात्रावास में फिलहाल भीषण जलसंकट है। 200 छात्राएं महज 1 चापाकल पर निर्भर है। छात्राओं को भोजन पकाने, नहाने, शौचालय की सफाई और पानी से जुड़े रोजमर्रा के अन्य कामों में काफी कठिनाई होती है। हॉस्टल की चारदीवारी काफी छोटी है, जिससे मनचले अक्सर परिसर में घुस आते हैं। इस वजह से छात्राएं काफी असहज और असुरक्षित महसूस करती हैं। छात्राओं की शिकायत है कि जिला प्रशासन और कल्याण विभाग को जानकारी देने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया।

पूरे साल हॉस्टल में रहती है पानी की किल्लत
छात्राओं ने बताया कि यूं तो पूरे साल पानी की किल्लत रहती है, लेकिन गर्मियों में स्थिति काफी विकट हो जाती है। उन्हें दूसरे हॉस्टल या आसपास के गांव में जाकर पानी लाना पड़ता है। हॉस्टल परिसर में महज 1 चापाकल है और उसमें भी पानी की गुणवत्ता काफी खराब है। आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि पानी लेने के लिए चापाकल के सामने छात्राएं कतार में लगी हैं। चापाकल से काफी कम पानी निकल रहा है और वह भी काफी गंदा है। पानी में पीलापन साफ देखा जा सकता है। छात्राओं ने बताया कि उन्हें रोजाना सुबह और शाम को इसी प्रकार कतार में लगना पड़ता है। समय पर पानी नहीं मिल पाने की वजह से उन्हें अक्सर कॉलेज और कोचिंग जाने में देरी हो जाती है। उनका पठन-पाठन भी प्रभावित होता है।

लड़कियां खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं
छात्राओं ने बताया कि लड़कियां खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, क्योंकि हॉस्टल के पिछले हिस्से की चारदीवारी काफी छोटी है। कई बार मनचले इसका फायदा उठाकर परिसर में घुस आते हैं। लड़कियों का कहना है कि जब सरकार आदिवासी समाज के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है तो उन्हें आदिवासी हॉस्टटल में पेयजल और सुरक्षा जैसे बुनियादी इंतजाम भी करने चाहिएं। यदि हॉस्टल की बिजली गुल हो जाए तो वैकल्पिक व्यवस्था मसलन, जनरेटर या इन्वर्टर का इंतजाम नहीं है। छात्राओं ने दावा किया कि हॉस्टल में सोलर पैनल लगाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह वादा अधूरा है।

जिला प्रशासन के आश्वासन पर भी समाधान नहीं
छात्राओं की शिकायत पर जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति के मनोनित सदस्य रमेश कुमार हेम्ब्रम ने हॉस्टल का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि हॉस्टल में पानी, बिजली और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बात का अफसोस है कि जिला प्रशासन के आश्वासन के बावजूद हालात में सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वह छात्राओं के साथ धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर सिस्टम का ध्यान इस ओर दिलाएंगे।
छात्राओं को इस बात का इंतजार है कि सिस्टम उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनेगा और संवेदनशील होकर इसका समाधान करेग....