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राजनीति में महिलाओं को मिले 50% आरक्षण, वे आधी आबादी हैं; बोलीं कल्पना मुर्मू सोरेन

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द फॉलोअप डेस्क:

झारखंड में गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने सवालिया लहजे में कहा कि जनगणना किए बिना परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने की जल्दीबादी केंद्र की मोदी सरकार क्यों दिखा रही है। आंकड़ों के बिना लोकसभा सीटों की संख्या में इजाफा या महिला आरक्षण का निर्धारण कहां तक सही है। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से राजनीति में महिला भागीदारी बढ़ाने की बात करते आए हैं। आज भी पूरी मजबूती से इसके समर्थन में खड़े हैं। लोकसभा या या राज्यों की विधानसभा, महिलाओं को उचित अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन इसके लिए जनगणना का इंतजार नहीं करना कहां तक न्यायसंगत है। 

 

क्या देश चलाने को नहीं चाहिए आंकड़ा
कल्पना मुर्मू सोरेन ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या देश चलाने के लिए अब आंकड़ों की जरूरत खत्म हो गई है। लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की बात है जिसके लिए परिसीमन करना है। महिला आरक्षण पर संसद में चर्चा है रही है लेकिन जनगणना किए बगैर, आंकड़ों के बिना इसे लागू करने की इतनी जल्दीबाजी क्यों है। 

लोकतांत्रिक ढांचा बदलने की बात है
गांडेय विधायक ने कहा कि यह केवल नीति का मामला नहीं है बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बदलने का भी फैसला है। ऐसा फैसला भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर लिया जाता है। गौरतलब है कि कल्पना मुर्मू सोरेन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी हैं। मई 2024 में पहली बार उपचुनाव जीतकर गांडेय की विधायक बनी थीं और फिर 2024 में विधानसभा चुनाव भी इस सीट पर जीता। 

कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि जब देश में महिलाओं आबादी लगभग आदी है तो फिर उनका प्रतिनिधित्व केवल 33 फीसदी तक ही सीमित क्यों है। आरक्षण का दायरा भी 50 फीसदी तक होना चाहिए। 

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