रांची
प्रांतीय यादव समाज द्वारा श्रीकृष्ण विकास परिषद झारखंड के तत्वावधान में आज धुर्वा स्थित जगन्नाथ स्वामी मंदिर प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्रीकृष्ण छठी महोत्सव का आयोजन पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया। इस अवसर पर परिषद के मुख्य संरक्षक व राजद नेता कैलाश यादव की अगुवाई में कार्यक्रम संपन्न हुआ। आयोजन की शुरुआत रामायण कीर्तन से की गई, जिसके उपरांत ठीक दोपहर 12 बजे बाल योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण को माखन, मिश्री और 56 भोग अर्पित कर भोग अर्पण की परंपरा निभाई गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण महामंत्र और भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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कैलाश यादव ने इस मौके पर कहा, "भगवान श्रीकृष्ण न केवल यदुवंशियों के आराध्य हैं, बल्कि वे संपूर्ण सृष्टि के पालनहार हैं जो कण-कण में वास करते हैं।" उन्होंने यादव समाज के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि आज देश में यादव समाज की जनसंख्या लगभग 40 करोड़ है, जो 26 प्रतिशत के करीब है। उन्होंने सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समाज को संगठित होकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
महाप्रभु श्रीकृष्ण के पांच मुख्य उपदेशों को उन्होंने हर मानव के लिए जीवन का आधार बताया:
1. कर्म योग – निष्काम भाव से कर्तव्य का पालन
2. ज्ञान योग – आत्मज्ञान और स्वभाव की समझ
3. भक्ति योग – भगवान के प्रति प्रेम, विश्वास और समर्पण
4. समत्व – सुख-दुख में समभाव बनाए रखना
5. निडरता – भयमुक्त होकर धर्म और लक्ष्य की रक्षा करना
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की स्थापना का प्रतीक रहा है। आज के समय में भी उनके उपदेश समाज को दिशा दे सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान दरिद्र नारायण सेवा के अंतर्गत कैलाश यादव ने अपने हाथों से जरूरतमंदों को भोग-प्रसाद वितरित किया, जिसे उपस्थित लोगों ने भोजन के रूप में ग्रहण किया।

ये अतिथि सम्मिलित हुए:
• डीसीपी प्रमोद कु. मिश्र
• जगन्नाथपुर थाना प्रभारी दिग्विजय सिंह
• विधानसभा थाना प्रभारी गणेश यादव
• एयरपोर्ट थाना प्रभारी कश्यप गौतम
• सब-इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह
साथ ही परिषद के पदाधिकारी एवं समाज के प्रमुख सदस्य अध्यक्ष सुरेश राय, सचिव रामकुमार यादव, उपाध्यक्ष बबन यादव, सुधीर गोप, विभाकर देवबिहारी यादव, सुरेश गोप, कुमार जितेंद्र यादव, सुमेर सिंह, अरुण यादव, उमेश यादव, सुनील यादव, श्रीनिवास राय, विजयकांत, मुखा राय, राजकिशोर यादव, पवन यादव, अशोक यादव, पीएन सिंह, चंद्रदेव यादव, संतोष यादव, मुन्ना यादव आदि शामिल थे।
महिलाओं की भी विशेष उपस्थिति रही, जिनमें पिंकी यादव, बबीता देवी, कलावती देवी, पूनम यादव, इंदु देवी, ऊषा देवी प्रमुख थीं।
