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के राजू और केशव महतो कमलेश ने साधी चुप्पी, राधाकृष्ण किशोर ने फिर कहा- तदाशा मिश्रा डीजीपी हैं, सर्वेसर्वा नहीं

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द फॉलोअप, रांची
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा स्कॉट वाहन और सुरक्षा गार्डों को लौटाए जाने के बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।  वहीं कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कुछ भी स्पष्ट बोलने से बचने की कोशिश की है। इस विवाद पर पूछने पर के राजू ने कहा कि वह फिलहाल पलामू में हैं। गांव-गांव घूम रहे हैं। वीडियो को देखा नहीं है। सब कुछ समझने के बाद ही बोलेंगे। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश का कहना है कि उन्होंने समाचार तो पढ़ा है, लेकिन सरकार का क्या नियम-कानून है, उसे समझने के बाद ही बोलेंगे। बार बार यह पूछने पर कि वित्त मंत्री के एक्ट से क्या सरकार में असहज स्थिति पैदा नहीं हो रही है, उन्होंने कुछ बोले बगैर फोन काट दिया। इधर सूत्रों का कहना है कि किशोर के पीछे पार्टी का समर्थन है। यही कारण है कि शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री ने डीजीपी पर फिर अटैक किया। उन्होंने यहां तक कहा कि डीजीपी तदाशा मिश्रा पुलिस प्रमुख हैं पर राज्य की सर्वेसर्वा नहीं हैं। वह कोई भी सवाल व्यवस्था पर उठा रहे हैं, व्यक्ति पर नहीं। किशोर ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह पीछे झुकने वाले नहीं हैं। इससे पहले डीजीपी ने कहा था कि वित्त मंत्री के पास सफिशिएंट वाहन हैं। अन्य मंत्रियों को भी तीन तीन स्कॉट वाहन ही दिए गए हैं।

विभाग में फाइल लटकी है तो लटकानेवाले पर होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह द्वारा 3 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में वित्त विभाग पर फाइल लटकाने और अनावश्यक क्वेरी किए जाने के आरोप पर भी वित्त मंत्री बोले। उन्होंने कहा कि रुल्स ऑफ एग्जक्यूटिव विजनेस के तहत सरकार का संचालन होता है। वह जानकारी ले रहे हैं कि वित्त विभाग में कब फाइल आयी, कब यहां से लौटी और अगर किसी ने विलंब किया तो वह कौन है। अगर प्रशाखा पदाधिकारी या अन्य किसी अधिकारी द्वारा फाइल लौटाने में विलंब किया गया है तो उसके विरुद्ध वह कार्रवाई करेंगे।

सबसे बड़ा सवाल, कौन सुलझाएगा बवाल
झारखंड में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वित्त मंत्री के द्वारा सुरक्षाकर्मियों और वाहनों को लौटाने से उत्पन्न बवाल को कौन सुलझाएगा। मुख्यमंत्री दिल्ली में थे, अब लौट आए हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश कोई इनिशिएटिव लेते नहीं दिख रहे हैं। वित्त मंत्री के विरुद्ध कांग्रेस के ही दो मंत्री इरफान अंसारी और दीपिका पांडेय के खड़े होने से सरकार के अंदर और बाहर असहज स्थिति उत्पन्न हो गयी है। इतना ही नहीं राधाकृष्ण किशोर पीछे मुड़ने को तैयार नहीं है। डीजीपी जब सफिशिएंट वाहन होने की बात कह रही है तो क्या वह चौथा वाहन वित्त मंत्री को उपलब्ध कराएंगी। अगर नहीं कराएंगी तो उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र से आने वाले वित्त मंत्री क्या बगैर सुरक्षा के चलेंगे। अगर डीजीपी चौथा वाहन उपलब्ध कराती हैं तो फिर सफिशिएंट वाहन रहने के बाद भी वित्त मंत्री को चौथा वाहन क्यों दिया जाएगा इसको लेकर सवाल खड़ा होगा। दूसरे मंत्रियों को भी चौथा वाहन उपलब्ध कराने का नैतिक और आधिकारिक दबाव, उन पर पड़ेगा।

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