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CID जांच में बयान से हटाए जा रहे बड़े नाम! JSSC मामले में बाबूलाल मरांडी ने की CBI जांच की मांग

CID जांच में बयान से हटाए जा रहे बड़े नाम! JSSC मामले में बाबूलाल मरांडी ने की CBI जांच की मांग

द फॉलोअप/ रांची: 
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने JSSC नियुक्ति घोटाले को लेकर चल रही CID जांच में लीपापोती का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जांच की दिशा से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सच्चाई को दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। मरांडी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग दोहराई है।

बयान से बड़े नाम हटाने का लगाया आरोप
सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जैसी आशंका थी, ठीक वैसी ही शिकायतें अब सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक, मामले में जिन लोगों को पकड़ा जा रहा है या जिनसे पूछताछ की जा रही है, वे यदि किसी हाईप्रोफाइल नेता, अधिकारी या उनके बिचौलियों के माध्यम से रिश्वत के लेन-देन और उनकी संलिप्तता की बात बताते हैं, तो उनके बयानों से उन हिस्सों को हटाए जाने की शिकायत मिल रही है।  मरांडी ने दावा किया कि जांच में शामिल कुछ छोटे अधिकारियों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर ऐसी शिकायतें उन तक पहुंचाई हैं। आरोप है कि विभागीय उच्चाधिकारी ऐसे बयान रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह जांच के नाम पर सच्चाई दबाने और प्रभावशाली लोगों को बचाने का बेहद गंभीर मामला है।

बयान दर्ज करने की वीडियोग्राफी की मांग
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मूल रिकॉर्डिंग को बिना किसी छेड़छाड़, काट-छांट या एडिटिंग के सुरक्षित रखा जाए, ताकि कोई अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार किसी व्यक्ति का बयान बदल न सके और न ही बदलवा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि बयान में किसी बड़े नाम के सामने आते ही उसे रिकॉर्ड से बाहर रखने की बेचैनी क्यों है। मरांडी ने पूछा कि जांच सच्चाई सामने लाने के लिए हो रही है या कुछ चेहरों को बचाने के लिए।

अनुराग गुप्ता की भूमिका पर भी उठाए सवाल
मरांडी ने कहा कि पहले अनुराग गुप्ता की भूमिका को लेकर जांच को गलत दिशा में ले जाने, साक्ष्य नष्ट करने और नियुक्ति में घोटाले से इनकार करने जैसे गंभीर आरोप उठे थे। उनके मुताबिक, छात्रों और बेरोजगारों के आंदोलन के बाद CID के रुख में आए बदलाव ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस मामले में शुरुआत में घोटाले से इनकार किया जा रहा था, उसी मामले में बाद की कार्रवाई उस शुरुआती रुख की जवाबदेही भी तय करने की मांग करती है।

छोटी मछलियों को पकड़कर बड़ी मछलियों को बचाने का आरोप
मरांडी ने आरोप लगाया कि अब मनोज कौशिक की अगुवाई में चल रही CID जांच को लेकर भी ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि छोटी मछलियों को बलि का बकरा बनाकर बड़ी मछलियों और कथित असली सरगनाओं को जांच की आंच से बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों का जवाब निष्पक्ष कार्रवाई और सुरक्षित साक्ष्यों के जरिए देना होगा। केवल छोटे लोगों की गिरफ्तारी दिखाकर बड़े नामों पर पर्दा डालने की आशंका दूर नहीं होगी।

जांच अधिकारियों को दी चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष ने जांच में शामिल अधिकारियों से स्पष्ट आग्रह के साथ कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि बयानों से नाम हटाने, डिजिटल साक्ष्य मिटाने या दबाव डालकर मनमाने बयान दर्ज कराने का कोई प्रयास हो रहा है तो उसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। मरांडी ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ हुए अन्याय पर पर्दा डालने का बोझ अपने सिर नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के लिए रिकॉर्ड से हटाया गया सच भविष्य में संबंधित अधिकारियों की अपनी भूमिका पर सवाल बन सकता है।

CBI जांच में साक्ष्य दबाने की शिकायतों की भी हो जांच
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि CBI जांच होने पर मूल घोटाले के साथ-साथ जांच को प्रभावित करने और साक्ष्य दबाने से जुड़ी शिकायतों की भी पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के सेवाकाल के पुराने कारनामों से जुड़े प्रमाण सामने आए हैं, उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुर्सी छूट जाने से किए-धरे की जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती। साथ ही आने वाली पीढ़ी के अधिकारियों को भी उन्होंने नसीहत दी कि सत्ता की कृपा पाने के लिए अपनी सेवा, साख और जमीर को दांव पर नहीं लगाना चाहिए।

CM हेमंत सोरेन से CBI जांच की अनुशंसा की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया कि छात्रों और बेरोजगारों को दोबारा सड़क पर उतरने के लिए मजबूर नहीं किया जाए। उन्होंने बिना विलंब CBI जांच की अनुशंसा करने की मांग की। उन्होंने साथ ही सभी मूल बयान, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की। मरांडी ने कहा कि युवाओं की उम्र और अवसर वापस नहीं लौटाए जा सकते। इसलिए उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वाले असली गुनहगारों के साथ-साथ उन्हें बचाने वालों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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