मनोज पाण्डेय
जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में पारदर्शिता और व्यापक सुधार की मांग को लेकर राजधानी के ऐतिहासिक जयपाल सिंह स्टेडियम में पिछले कई दिनों से आंदोलनरत प्रतियोगी छात्रों ने एक बड़ा और सकारात्मक रुख अपनाया है। 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव के कार्यक्रम के बीच, अभ्यर्थियों के प्रमुख संगठन 'रिफॉर्म मंच' ने आंदोलन को उग्र रूप देने के बजाय सीधी बातचीत का रास्ता चुनने का संकेत दिया है। मंच के कोर ग्रुप सदस्य राजेश प्रसाद ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे संवाद की भावुक और विनम्र अपील की है।

"सड़क पर प्रदर्शन प्राथमिकता नहीं, टेबल टॉक से निकले रास्ता"
पत्रकारों को संबोधित करते हुए राजेश प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रतियोगी छात्र किसी भी स्थिति में सरकार के साथ टकराव का माहौल नहीं चाहते। छात्रों का मकसद सड़क पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करना, पुतला दहन करना या मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना नहीं है। छात्र चाहते हैं कि मुख्यमंत्री एक अभिभावक के रूप में आगे आएं और अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित करें। छात्रों की प्राथमिकता अपनी जायज मांगों को लेकर बंद कमरे में टेबल पर बैठकर प्रशासनिक समाधान तलाशना है, ताकि वे जल्द से जल्द अपनी पढ़ाई की ओर लौट सकें।
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"फैसला हमारे पक्ष में हुआ तो पूरा श्रेय हेमंत सोरेन का होगा"
आंदोलन को राजनीतिक रंग से दूर रखते हुए छात्र नेता ने एक बड़ा दिल दिखाते हुए सरकार के प्रति सकारात्मक संदेश दिया है। राजेश प्रसाद ने कहा कि यदि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रतियोगी युवाओं के भविष्य और हित में सकारात्मक कदम उठाते हैं और उनकी मांगों को स्वीकार करते हैं, तो इसका पूरा श्रेय किसी राजनीतिक दल, संगठन या नेता को नहीं, बल्कि खुद मुख्यमंत्री को ही जाएगा। अभ्यर्थियों की इस भावुक और शांतिपूर्ण अपील के बाद अब पूरा ध्यान राज्य सरकार और मुख्यमंत्री आवास पर टिक गया है। देखना दिलचस्प होगा कि 20 अगस्त के प्रस्तावित घेराव से पहले राज्य सरकार छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से सीधी वार्ता का समय देती है या नहीं।
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