द फॉलोअप, रांची
झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री के 12 साल के कार्यकाल को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कटाक्ष किया। भाजपा को "भारतीय गबन पार्टी" का नाम दिया। 2014 में सत्ता में आने के बाद, साल 2016 से देश में घोटालों और गवन की एक लंबी सीरीज शुरू हुई है। उन्होंने कुल 24 कथित गवन के मामलों में से कुछ मुख्य बिंदुओं को सिलसिलेवार तरीके से जनता के सामने रखा।
नोटबंदी से लेकर समुद्र तक सब कुछ कॉर्पोरेट के हवाले?
उसमें सबसे पहला नोटबंदी के माध्यम से करेंसी गबन। उसके बाद शुरू हुआ पीएसयू गबन, यानि जितने भी पब्लिक सेक्टर यूनिट्स थे, सबको अपने मित्रों को दे देना। उसके बाद हुआ बैंक गबन। बैंकों को आपस में मिला देना ताकि उनके मित्रों के जो 18 लाख करोड़ रुपये के लोन राइट-ऑफ हुए हैं, उनका पता न चले। फिर हुआ जंगल गबन, जो आरएसएस से शुरू हुआ और आज तक चल रहा है। फिर शुरू हुआ है समुद्र गबन। हर 500 किलोमीटर के समुद्री तट पर अडानी का पोर्ट होगा।
देश के संसाधनों और आस्था पर कब्ज़े का गंभीर आरोप
उसके बाद हुआ आकाश गबन, जिसके तहत एयरपोर्ट्स को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के हाथों से लेकर जीएमआर और अडानी जैसे लोगों को दे दिया गया। फिर हुआ पहाड़ गबन, उत्तराखंड से लेकर अरावली तक। फिर आया पशु गबन, जहां एक निजी कॉर्पोरेट को 'वंतारा' प्रोजेक्ट के नाम पर सरकारी पशु दे दिए गए। फिर आया शहीद गबन, जो पुलवामा से शुरू हुआ और अभी सिंदूर तक चला। इस देश में भाजपा के राज में शहीदों का भी गबन होता है! खैर, भाजपा के राज में इसके पहले कारगिल के समय 'ताबूत घोटाला' भी हुआ था। फिर, भाजपा के आने के बाद मंदिर गबन शुरू हुआ। चाहे काशी हो, मथुरा हो, या अयोध्या। आज तक हिंदुस्तान ने कभी नहीं देखा कि मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे से कोई चीज़ चोरी हुई हो। लेकिन अयोध्या के श्रीराम मंदिर से अरबों रुपए की चोरी हो गयी।