गढ़वा
खनिज संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने विरोध तेज कर दिया है। पूर्व मंत्री एवं झामुमो केंद्रीय महासचिव मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि विधेयक से झारखंड के आर्थिक हित और संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा से देश को ऊर्जा और औद्योगिक विकास में बड़ी ताकत मिलती है, इसलिए संसाधनों का लाभ देने वाले राज्य के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा असर
मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि झारखंड देश के खनिज संसाधनों में अहम योगदान देता है। ऐसे में खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व और राज्य के वैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रभावित होने का सीधा असर राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा और इससे मुफ्त बिजली, मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेंशन जैसी योजनाओं के संचालन में चुनौती बढ़ सकती है।
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उपलब्ध संसाधन भी सीमित हो सकते हैं
उन्होंने कहा कि राज्य की आय में कमी आने से विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधन भी सीमित हो सकते हैं। खनिज संपदा केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान और जनता के अधिकारों से जुड़ा विषय है। जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के अधिकारों की रक्षा झामुमो के आंदोलन की मूल भावना रही है। पार्टी राज्य के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी। मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि झारखंड के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने राज्य की जनता और विभिन्न वर्गों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, “सवाल सिर्फ खनिज का नहीं है, सवाल झारखंड के अधिकार और जनता के हक का है।”

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