द फॉलोअप डेस्क, रांची:
झारखंड में खनिज संसाधनों पर राज्य सरकार द्वारा सेस लगाने के अधिकार को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भाजपा पर निशाना साधा है। पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा को बताना चाहिए कि उसे झारखंड के हितों से परेशानी है या फिर उन बड़े कारोबारियों से, जिन पर सेस का आर्थिक असर पड़ सकता है।
विनोद पांडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने 8:1 के फैसले में राज्यों के खनिज संसाधनों और खनिज वाली जमीन पर टैक्स लगाने के अधिकार को मान्यता दी है। ऐसे में भाजपा की ओर से इस अधिकार पर सवाल उठाना राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने जैसा है।
झामुमो ने भाजपा के सामने तीन सवाल रखे
पार्टी ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट राज्यों के अधिकार को स्पष्ट कर चुका है, तो झारखंड के अपने खनिजों पर सेस लगाने पर भाजपा को आपत्ति क्यों है। पार्टी का दूसरा सवाल है कि खनिज झारखंड से निकलता है और इसके कारण होने वाले प्रदूषण व सामाजिक नुकसान का असर यहां के लोगों पर पड़ता है, तो इससे मिलने वाले राजस्व पर फैसला लेने का अधिकार राज्य को क्यों नहीं होना चाहिए।

झारखंड के खनिज पर राज्य का हक, सस्ते में देने का दबाव नहीं
तीसरे सवाल में झामुमो ने विनोद पांडेय ने कहा कि अगर झारखंड का खनिज महंगा है तो खरीदार दूसरे राज्यों से खनिज ले सकते हैं। लेकिन झारखंड को अपने प्राकृतिक संसाधन कम कीमत पर देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। दशकों से झारखंड से कोयला, लौह अयस्क और दूसरे खनिज बाहर भेजे जाते रहे हैं। झामुमो का आरोप है कि इन संसाधनों का आर्थिक लाभ काफी हद तक राज्य से बाहर गया, जबकि विस्थापन, प्रदूषण और जमीन-जंगल के नुकसान का बोझ स्थानीय लोगों ने उठाया।

खनिज आय का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाने की मांग
विनोद पांडेय ने कहा कि अब ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी जिसमें संसाधन झारखंड से निकाले जाएं, लेकिन उनकी कीमत और लाभ का फैसला दूसरे लोग करें। उन्होंने कहा कि राज्य अपने प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय का इस्तेमाल आदिवासी, मूलवासी, खनन प्रभावित परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के विकास के लिए करना चाहता है। झामुमो ने साफ कहा कि भाजपा के दबाव के बावजूद झारखंड अपने संवैधानिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों पर अपने हक से पीछे नहीं हटेगा।