रांची
झारखंड में आदिवासी अस्मिता और मानवाधिकारों से जुड़ा सूर्या हांसदा उर्फ सूर्य नारायण हांसदा का एनकाउंटर अब राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। इस संवेदनशील मामले में आज 'झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा' (JLKM) ने राज्यपाल महामहिम संतोष गंगवार से औपचारिक मुलाकात की और मुठभेड़ की निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
संगठन के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में पहुंचे शिष्टमंडल ने राज्यपाल को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। महतो ने एनकाउंटर से जुड़े कई दस्तावेजी साक्ष्य व तथ्य भी राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किए। इस दौरान महामहिम ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच का सकारात्मक आश्वासन दिया।

देवेंद्रनाथ महतो ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “सूर्या हांसदा सामाजिक न्याय के लिए एक सशक्त आवाज थे। उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों और सरकार की जनविरोधी नीतियों का लगातार विरोध किया। कई बार संवैधानिक चुनावों में हिस्सा लेकर उन्होंने यह सिद्ध किया कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते थे। लेकिन उनके जैसे व्यक्तित्व को शासन-प्रशासन ने साजिश के तहत रास्ते से हटाने का काम किया है।”
महतो ने कहा कि हांसदा की 10 अगस्त को गिरफ्तारी और 11 अगस्त को एनकाउंटर, न केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाता है, बल्कि यह आदिवासी समाज के भीतर भय और असुरक्षा का वातावरण भी निर्मित करता है। उन्होंने कहा कि आज सूर्या हांसदा का परिवार गहरे दुख और असहायता के दौर से गुजर रहा है, जिन्हें न्याय दिलाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें की गई हैं:
1. पूरा मामला CBI को सौंपा जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो।
2. जिन अधिकारियों या व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आए, उन पर त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. पीड़ित परिवार को समुचित मुआवजा और भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकारी आश्रय व सहायता दी जाए।
महतो ने यह भी जानकारी दी कि यह मुद्दा आने वाले मानसून सत्र में डुमरी विधायक जयराम महतो के माध्यम से विधानसभा में उठाया जाएगा। इसके साथ ही, जनदबाव बनाने के लिए संगठन राज्यव्यापी जनांदोलन की रूपरेखा भी तैयार कर चुका है।
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राजभवन पहुंची शिष्टमंडली में देवेंद्रनाथ महतो के अलावा आलोक उरांव, पार्वती कुमारी, जितेंद्र महतो, और राजू महतो शामिल रहे। गौरतलब है कि इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए झारखंड सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सूर्या हांसदा के एनकाउंटर पर केंद्र और राज्य, दोनों ही स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि झारखंड सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या वास्तव में किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाती है। वहीं, जनता और आदिवासी समाज में न्याय की उम्मीदें अब राजभवन से बंधी हुई हैं।
