रांची
झारखंड उद्योग निदेशालय द्वारा आज उद्योग निदेशालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता – राज्य इकोसिस्टम को प्रोत्साहन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया, इसमें रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर झारखंड सरकार के MSME और उद्योग जगत को जोड़ने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा मुख्य रूप से शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में रक्षा विनिर्माण से जुड़ी संभावनाओं को बढ़ावा देना, उद्योग, शिक्षण संस्थानों एवं सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना तथा स्थानीय उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की रणनीति तैयार करना था।

उपलब्ध अवसरों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी
कार्यशाला की अध्यक्षता उद्योग निदेशक विशाल सागर ने की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की पहल के तहत झारखंड को परीक्षण, प्रमाणन, गुणवत्ता आश्वासन एवं मानक विषय के लिए सह-प्रधान राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने रक्षा निर्माण के क्षेत्र में राज्य की क्षमताओं को विकसित करने एवं उद्योगों की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। कार्यशाला में सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, बीआईटी मेसरा, एनआईटी जमशेदपुर सहित विभिन्न संस्थानों ने रक्षा विनिर्माण से जुड़े तकनीकी विषयों, अनुसंधान, टेस्टिंग, क्वालिटी स्टैण्डर्ड, एवं उद्योगों के लिए उपलब्ध अवसरों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। साथ ही एमएसएमई की भागीदारी, तकनीकी विकास, कौशल संवर्धन एवं आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अग्रणी राज्य बनने की पर्याप्त संभावनाएं
चैम्बर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि झारखंड के पास खनिज संसाधनों, इंजीनियरिंग क्षमता, कुशल कामगार, लौह अयस्क एवं औद्योगिक आधार के कारण डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अग्रणी राज्य बनने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। झारखण्ड चैंबर राज्य के उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई को रक्षा उत्पादन से जोड़ने तथा आवश्यक नीतिगत सहयोग एवं संवाद के लिए निरंतर कार्य करेगा। उन्होंने उद्योग विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम राज्य में निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन के नए अवसर प्रदान करेंगे। कार्यशाला में उद्योग विभाग के अधिकारियों के अलावा विभिन्न औद्योगिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लेकर रक्षा क्षेत्र में झारखंड की संभावनाओं पर अपने सुझाव साझा किए।
