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झारखंड सचिवालय सेवा संघ की मांग: प्रमोशन के बाद पदस्थापन कागजों पर नहीं, धरातल पर हो

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में पदोन्नत अधिकारियों के पदस्थापन को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। संघ ने कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर आगाह किया है कि अधिकारियों को प्रमोशन तो मिल रहा है, लेकिन उन्हें उनके मूल संवर्ग के पदों के बजाय अपग्रेड किए गए पदों पर ही बनाए रखना प्रशासनिक विफलता और मानव संसाधन का कुप्रबंधन है।


मुख्य समस्या: प्रमोशन मिला पर जिम्मेदारी नहीं बदली
संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में बताया गया है कि विभाग के पुराने आदेश (03.11.2020) का उद्देश्य प्रमोशन में होने वाली देरी के कारण अधिकारियों को होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाना था। इसके तहत, जिस पद पर अधिकारी तैनात थे, उसी पद को 'उत्क्रमित' कर उन्हें प्रोन्नति का लाभ दे दिया गया।


संघ का आरोप है कि:
* यह व्यवस्था एक "वैकल्पिक" व्यवस्था के तौर पर शुरू की गई थी, लेकिन अब यह स्थायी रूप ले चुकी है।
* अधिकारी कागजों पर "वरिय" हो गए हैं और वेतन भी अधिक ले रहे हैं, लेकिन काम आज भी वही "कनीय" (Junior) स्तर का कर रहे हैं।
* इससे अधिकारियों को उनके पद की वास्तविक कार्य जिम्मेदारी (Actual Job Responsibility) नहीं मिल पा रही है, जो कार्य कुशलता की दृष्टि से गलत है।
सरकारी खजाने और कार्य क्षमता पर दोहरा बोझ
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस व्यवस्था से राज्य सरकार को दुहरा नुकसान हो रहा है। एक तरफ सरकार कनीय पदों के काम के लिए वरिय वेतनमान का भुगतान कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सचिवालय के कई महत्वपूर्ण वरिय पद रिक्त पड़े हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है।
चौंकाने वाले आंकड़े: 19 में से 9 संयुक्त सचिवों की स्थिति गंभीर
संघ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में कार्यरत 19 संयुक्त सचिवों में से 09 ऐसे हैं जिन्हें अवर सचिव से उप सचिव और फिर उप सचिव से संयुक्त सचिव के दो स्तरों की प्रोन्नति उसी एक पद पर दे दी गई है।
* उदाहरण: पर्यटन, कला, संस्कृति विभाग में एक भी संयुक्त सचिव का पद स्वीकृत नहीं है, फिर भी वहां चार संयुक्त सचिव कार्यरत हैं।
* विडंबना: इसके उलट गृह, स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे महत्वपूर्ण विभागों में संयुक्त सचिव के पद रिक्त पड़े हैं।


कार्मिक विभाग में ही कुप्रबंधन पर सवाल
संघ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो विभाग (कार्मिक विभाग) पूरे राज्य के प्रशासनिक सुधार के लिए 'नोडल विभाग' है, वहीं मानव संसाधन का ऐसा कुप्रबंधन चिंताजनक है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक स्थिरता को प्रभावित कर रही है, बल्कि कुशल प्रशासन की अवधारणा के भी विपरीत है।
संघ की अंतिम मांग
झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सचिव से विनम्र अनुरोध किया है कि इन तथ्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए, सभी वरिय अधिकारियों को उनके द्वारा धारित "उत्क्रमित पदों" के स्थान पर तत्काल प्रभाव से वास्तविक स्वीकृत पदों के विरुद्ध पदस्थापित किया जाए।