द फॉलोअप डेस्क
सरकार के फैसले के विरोध में सचिवालय सेवा के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट भवन परिसर में आज जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने कार्मिक सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसले को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों ने दादागीरी नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए। सचिवालय सेवा संघ का आरोप है कि सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से पूर्व में लागू नियमों में संशोधन कर सचिवालय सेवा के अधिकारियों के साथ अन्याय किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से उनकी प्रोन्नति की अवधि दोगुनी हो गई है, जिससे उनके करियर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

8 साल की जगह 16 साल में मिलेगी प्रोन्नति
सचिवालय सेवा संघ के अनुसार राज्य सरकार ने पहले कार्मिक विभाग के संकल्प संख्या-3286 के तहत सभी सेवाओं के कर्मियों और अधिकारियों की प्रोन्नति के लिए समय-सीमा निर्धारित की थी। इसी संकल्प के आधार पर सचिवालय सेवा के अधिकारियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग को उक्त संकल्प के अनुरूप प्रोन्नति देने का निर्देश दिया था। इस मामले में अगली सुनवाई 9 जुलाई को प्रस्तावित है। लेकिन इस बीच राज्य सरकार ने कैबिनेट के फैसले के जरिए उसी संकल्प में संशोधन कर सचिवालय सेवा को उसके दायरे से बाहर कर दिया। संशोधन के बाद सचिवालय सेवा के अधिकारियों की प्रोन्नति के लिए निर्धारित अवधि 8 वर्ष से बढ़ाकर 16 वर्ष कर दी गई है।

संघ बोला- कम ग्रेड पे वालों को पहले मिलेगी प्रोन्नति
सचिवालय सेवा संघ का कहना है कि सरकार के इस फैसले से सचिवालय सेवा के अधिकारियों के साथ भेदभाव होगा। संघ के पदाधिकारियों का दावा है कि उनसे कम ग्रेड पे वाले अधिकारी और कर्मचारी उनसे पहले और कम सेवा अवधि में प्रोन्नत हो जाएंगे, जबकि सचिवालय सेवा के अधिकारियों को दोगुना इंतजार करना पड़ेगा। प्रदर्शनकारी अधिकारियों ने सरकार से कैबिनेट के फैसले पर पुनर्विचार करने और पूर्व व्यवस्था को बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।