द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड पुलिस मुख्यालय में 16 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। यह कार्रवाई डीजीपी के निर्देश पर सीआरपीएफ, झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियान ‘नवजीवन-II’ के तहत हुई। आत्मसमर्पण कार्यक्रम में डीजीपी तदाशा मिश्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरेंडर करने वालों में 14 नक्सली पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल की मारक टीम के प्रमुख सिपहसालार बताए जा रहे हैं।

माओवादी सुरक्षा घेरा टूटा, कई इनामी कमांडर शामिल
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली चाईबासा, कोल्हान और सारंडा क्षेत्र के हर हिस्से से परिचित थे और संगठन के लिए ह्यूमन शील्ड की तरह काम करते थे। इनके आत्मसमर्पण के साथ ही माओवादी नेतृत्व का सुरक्षा घेरा टूट गया है। सरेंडर करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी संतोष महतो समेत 3 जोनल कमांडर और 3 सब-जोनल कमांडर शामिल हैं। ये सभी पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, गिरिडीह, बोकारो और ओडिशा के सुंदरगढ़ क्षेत्र में सक्रिय थे।

दो महीने की ट्रिपल स्ट्राइक से संगठन कमजोर
पिछले दो महीनों में सुरक्षा बलों की रणनीति ने माओवादी संगठन को अंदर तक कमजोर कर दिया है। गिरफ्तारी, मुठभेड़ और सरेंडर की ‘ट्रिपल स्ट्राइक’ से संगठन की रीढ़ टूटती नजर आ रही है। 21 मई को 27 बड़े नक्सल कमांडरों के सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इसके बाद 13 जुलाई को 20 लाख रुपये के इनामी कमांडर रवींद्र गंझू की गिरफ्तारी और 17 जुलाई को 25 लाख रुपये के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर के पकड़े जाने से संगठन को लगातार झटके लगे। वर्ष 2026 में अब तक 93 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 22 नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है।

छत्तीसगढ़ तक असर, हथियार और कारतूस बरामद
इस आत्मसमर्पण का असर झारखंड से बाहर भी देखने को मिल रहा है। इसी दस्ते के 8 अन्य नक्सलियों, जिनमें 5 महिला कमांडर शामिल हैं, ने छत्तीसगढ़ में पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया है। सरेंडर करने वाले 16 नक्सलियों के पास से 11 हथियार और 1,562 गोलियां बरामद की गई हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के कारण अब नक्सलियों के सामने मुख्यधारा में लौटने या फिर कानूनी कार्रवाई का सामना करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।