रांची
माल और सेवा कर (GST) की संशोधित नीति से झारखंड को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि नई व्यवस्था से ऑटोमोबाइल, सीमेंट और अन्य उत्पादन क्षेत्रों में करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि झारखंड एक उत्पादन आधारित राज्य है, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद से इसे लगातार घाटा उठाना पड़ा है। 2017 से 2024-25 तक झारखंड को करीब 16,408 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और 2029 तक यह घाटा 61,670 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य में कोयला और स्टील का 75 से 80 प्रतिशत उत्पादन बाहर खपता है। इसका फायदा उपभोक्ता राज्यों को हो रहा है, जबकि झारखंड को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 से 2022 तक जीएसटी मुआवजा मिलने के बाद इसे बंद कर दिया गया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राज्य अब आर्थिक रूप से मजबूत हो गया है।

राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर है। केवल 22 प्रतिशत खेतों में सिंचाई की सुविधा है, पर्यटन क्षेत्र में संभावनाएं होने के बावजूद निवेश की कमी है और स्वास्थ्य व मानव संसाधन के क्षेत्र में भी राज्य को बहुत काम करना है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि झारखंड को हर साल कम से कम 2,000 करोड़ रुपये गारंटी के तौर पर दिए जाएं, जब तक कि राज्य की राजस्व आय मजबूत न हो जाए। साथ ही उन्होंने जीएसटी दरों को संतुलित करने, विलासिता और सिगरेट-शराब जैसे उत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाने और सभी राज्यों के लिए एक मज़बूत राजस्व संरक्षण ढांचा तैयार करने की अनुशंसा की।
