द फॉलोअप डेस्क
झारखंड सरकार के बजट का अवलोकन करने से साफ प्रतीत होता है कि यह बजट राज्य को लूटने के लिए तैयार किया गया है। यह बजट दिशाहीन बजट है। झारखंड सरकार कर बजट हमीन कर बजट नहीं, लूट कर बजट हेके। ये बातें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश नही लगेगा तब तक झारखंड का भला नही होने वाला है। उन्होंने राज्य सरकार की विजन पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार बजट तो बनाती है लेकिन उसे धरातल पर उतार नही पाती है। दीपक प्रकाश ने राज्य सरकार के बजट को पुरानी बोतल में नई शराब की संज्ञा देते हुए कहा कि यह बजट केवल जनता को दिग्भ्रमित करने वाला बजट है। यह बजट आदिवासी,महिला, दलित ,गरीब और मजदूर विरोधी है।

पिछले बजट का 44 प्रतिशत ही र्खच कर पाई
दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्य का बजट गांव, किसान, मजदूर जो आवश्यक चीजों से वंचित है उन्हें केंद्र बिंदु में रखकर बनाया जाना चाहिए था। पिछले बजट का आकार 1 लाख करोड़ का था। लेकिन सरकार उस बजट में से मात्र 44 प्रतिशत ही खर्च कर पाई। यह सरकार की कथनी और करनी को उजागर करने के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि पिछले बजट में कृषि क्षेत्र के लिए जितनी राशि का प्रावधान किया गया था उसमें से सिर्फ राज्य सरकार 12 प्रतिशत ही खर्च पाई। शिक्षा क्षेत्र में बजट का 53 प्रतिशत, शहरी विकास के क्षेत्र में 23.91 प्रतिशत, जलसंसाधन विभाग में 44.54 प्रतिशत,अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिये आवंटित की गई राशि का 67.1 प्रतिशत,पेयजल विभाग में 22.09,खाद्य आपूर्ति विभाग में 30.04 प्रतिशत राशि ही सरकार खर्च कर पाई है। इससे हम कह सकते है कि सरकार के पास बजट की राशि को खर्च करने की योजना तथा नियत ही नही है। केंद्र सरकार के द्वारा गव्य विकास योजना के तहत जो राशि राज्य सरकार को दी गयी थी उस पैसे को राज्य सरकार खर्च ही नही कर पाई है।
झारखंड में प्रति व्यक्ति आय 87 हजार
भारत की प्रति व्यक्ति आय है 1 लाख 97 हज़ार रुपए, जबकि झारखंड का प्रति व्यक्ति आय 87 हज़ार रुपए है। आज राज्य का शिक्षा की हालत बदतर हो गयी है। 45 हज़ार सरकारी स्कूलों में से 6200 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। 90 हज़ार से अधिक पद खाली पड़े हैं। 64 प्रतिशत सरकारी विद्यलायों में बच्चों के खेलने के लिए मैदान नही है। 37 प्रतिशत विद्यलायों में पुस्तकालय नही है। रघुवर सरकार के समय खरीदे गए एंबुलेंस आज सड़ रहे हैं। सरकार उसका उपयोग नही कर पा रही है। जबकि, एंबुलेंस की कमी के कारण लोग खटिया में मरीजों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं। पुराने मेडिकल कॉलेज बंद है।
माल महाराज का, मिर्जा खेले होली
माल महाराज का और मिर्जा खेले होली वाली कहावत को हेमंत सरकार चरितार्थ कर रही है। दीपक प्रकाश ने कहा कि आयुष्मान योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री ने अपने नाम पर किया लेकिन प्राइवेट अस्पतालों को पैसा नहीं दे रहे। नतीजा आयुष्मान योजना आज झारखंड में फेल है। हर घर नल से जल योजना आज झारखंड में पूरी तरह से फेल हो चुका है। राज्य के 61 लाख परिवारों में से मात्र 19 लाख परिवार को ही कनेक्शन दिया गया है,परंतु जल अभी तक नही मिला है।

यूपीए सरकार की तुलना की
देश के मोदी के नेतृत्व में चल रही भाजपा सरकार और यूपीए सरकार की झारखंड़ के नजरिये से तुलना करते हुए दीपक प्रकाश ने कहा कि मोदी सरकार ने राज्य को पांच साल में टैक्स का 89 हज़ार 648 करोड़ रुपए दी। वहीं, यूपीए की सरकार अपने 5 साल के कार्यकाल में 35 हज़ार 9 98 करोड़ रुपए दी थी। मोदी सरकार ने झारखंड को ग्रांट ऐड के रूप में 2022-23 में 17 हज़ार 405 करोड़ रुपये दी, जबकि यूपीए की सरकार ने 2013-14 में मात्र 4 हज़ार 65 करोड़ रुपये दी थी। उन्होंने कहा कि हेमंत जिस दल के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं वह दल अपने आपको आदिवासी की हितैषी कहती है। लेकिन यूपीए की केंद्र सरकार ने आदिवासी कल्याण के जो राशि 2013-14 में आवंटित की थी वो मात्र 19 हज़ार 433 करोड़ रुपए थी, जबकि भाजपा की सरकार ने आदिवासी कल्याण के लिए 2023-24 में 1 लाख 19 हज़ार करोड़ रुपये आवंटित की है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रदेश के कोषाध्यक्ष दीपक बंका, मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, अमित सिंह, मृत्युंजय शर्मा व राहुल अवस्थी उपस्थित थे।
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