द फॉलोअप, रांची
MMDR Amendment Bill, 2026 का झारखंड पर सबसे बड़ा वित्तीय असर Mineral Bearing Land Cess पर पड़ सकता है। बिल को लोकसभा ने 12 अगस्त और राज्यसभा ने 13 अगस्त 2026 को मंजूरी दी है। झारखंड को इस बिल से 14656 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है। यह आंकड़ा राज्य सरकार के 2026-27 के बजट में लगाए गए अनुमान पर आधारित है। बजट में झारखंड सरकार ने सेस से 14656 करोड़ प्राप्त होने का अनुमान लगाया है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड सरकार ने सेस से 13442 करोड़ की राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया था। इस वर्ष इस राशि में 1214 करोड़ की वृद्धि की है।
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यहां मालूम हो कि 25 जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के mineral rights पर टैक्स लगाने के अधिकार को मान्यता दी थी। mineral-bearing land पर राज्यों की taxation power को भी महत्वपूर्ण माना था। नए Bill में केंद्र इन शक्तियों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड सरकार ने 12 अगस्त 2024 को विधानसभा से Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Bill पारित कराया। विधानसभा से पारित विधेयक को 26 सितंबर 2024 को राज्यपाल ने मंजूरी दी। 7 अक्टूबर 2024 को गजट प्रकाशन के साथ Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act, 2024 राज्य में लागू हो गया। इस कानून के प्रभावी होने के साथ राज्य सरकार ने कोयला और लोहा पर प्रति टन 100 रुपए का सेस लगा दिया।

प्रभावित होने वाले प्रमुख राज्य
इस नये बिल से प्रभावित होने वाले प्रमुख राज्यों में झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना प्रमुख है। झारखंड में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट की प्रचुरता है। उड़ीसा भी लगभग इसी श्रेणी में हाँ, जहां लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, क्रोमाइट पाया जाता है। तीसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ है जहां कोयला और बॉक्साइट प्रचूर भंडार है। इसके अलावा राजस्थान और कर्नाटक पर भी इस नये कानून का प्रभाव दिखता है।

केंद्र ने क्यों लाया संशोधन विधेयक
केंद्र सरकार का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग सेस और लेवी से खनन कंपनियों की लागत बढ़ती है। इससे खनिजों की कीमत बढ़ सकती है। निवेश प्रभावित हो सकता है और कई खनन परियोजनाएं बहुत लाभकारी सिद्ध नहीं हो सकती हैं। Bill इसी तरह के अनिश्चित और कई स्तर के लेवी ढांचे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि संशोधन बिल से नयी परियोजनाएं तेजी से शुरू होंगी। औद्योगिक निवेश को फायदा मिलेगा। कोयला, लोहा और अन्य खनिज पर downstream industries को राहत मिल सकती है। इससे रोजगार और और आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकेंगी।
राज्य और केंद्र में बढ़ सकता है तकरार

2024 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के mineral rights पर टैक्स लगाने के अधिकार को मान्यता दी थी और mineral-bearing land पर राज्यों की taxation power को भी महत्वपूर्ण माना था। नए Bill में केंद्र इन शक्तियों पर सीमाएं लगाने का प्रयास कर रहा है। PRS ने भी Bill के कुछ प्रावधानों की संवैधानिकता पर सवाल उठाए हैं।
झारखंड ने अब तक कितना सेस कमाया/अनुमानित किया?
वित्तीय वर्ष Mineral Bearing Land Cess
2024-25 ₹1,976 करोड़ अनुमानित
2025-26 मूल बजट अनुमान ₹6,400 करोड़
2025-26 संशोधित अनुमान करीब ₹9,900 करोड़
2026-27 बजट अनुमान ₹14,656 करोड़
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