द फॉलोअप, रांची
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने झारखंड प्रदेश भाजपा को सांगठनिक मजबूती और जनता के बीच अपने जनाधार को बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण टास्क दिए हैं। शाह ने झारखंड भाजपा के कोर टीम को निर्देश दिया है कि वे मिल कर तीन प्रमुख विषयों को लेकर जनता के बीच जाएं। पार्टी की आवाज को मजबूत करें। केंद्र सरकार द्वारा MMDR Bill में किए गए संशोधन के उद्देश्यों से जनता को अवगत कराएं। झारखंड की जनता को बताएं कि यह संशोधन झारखंड की जनता के विरुद्ध नहीं है। यह राज्य और देश हित में ही। इसके अलावा अमित शाह ने भाजपा नेताओं को छात्रों की समस्या और मांग पर मुखर होने का निर्देश दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी को लेकर आक्रामक रहने का सुझाव दिया है। इसी तरह FCRA Bill के प्रभाव से जनता को अवगत कराने का निर्देश दिया है। मालूम हो कि विदेशों से होने वाली फंडिंग को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा इस बिल को पेश किया था। लेकिन संसद से बिल पास नहीं हो सका और यह फिलहाल संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के विचारार्थ भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री ने प्रदेश के भाजपा नेताओं को एसआईआर को लेकर भी मुखर और प्रखर होने का टिप्स दिया है।
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एसआईआर में लाखों की संख्या में मतदाताओं के नाम कटेंगे। इसके बाद विपक्ष द्वारा शुरू किए जाने वाले आंदोलन और बयानबाजी का जोरदार तरीके से प्रतिरोध करने का सुझाव दिया है। तथ्यात्मक ढंग से जनता को नाम कटने का कारण बताने को कहा है। घुसपैठ के मुद्दे पर झारखंड में भाजपा को आक्रामक रहने का संदेश दिया गया है। अमित शाह से प्रदेश भाजपा के टॉप-8 नेता मिले। जानकारी के अनुसार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो आदित्य साहु ने मिलने वाली सूची में 24 नेताओं के नाम भेजे थे। लेकिन अमित शाह द्वारा आठ नामों को ही स्वीकृति दी गयी। उनमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय, दीपक प्रकाश और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल थे।

जानकारी के अनुसार बैठक में झारखंड के भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार की गतिविधियों से भी अवगत कराया। जेपीएससी और जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और छात्र आंदोलन की भी जानकारी दी। साथ ही बताया कि कैसे राज्य सरकार ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द किया है। सीबीआई जांच की मांग को नकारते हुए रिटायर जज की अध्यक्षता में सीआईडी से जांच कराने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले का राज्य की राजनीति और छात्रों पर क्या असर पड़ेगा।
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