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18 अप्रैल से सीएम हाउस के बाहर सहायक अध्यापकों का अनशन, 40,000 शिक्षक करेंगे शिरकत

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड राज्य आकलन प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा की ओर से राज्य कमेटी के निर्णय के तहत आंदोलन की तैयारी तेज कर दी गई है। सभी प्रखंड कमेटियों को 5 अप्रैल तक बैठक आयोजित करने और 12 अप्रैल तक सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के विधायकों को मांग पत्र सौंपने का निर्देश दिया गया था। हालांकि कई प्रखंडों में बैठक नहीं हो सकी और अब तक करीब 20 विधायकों को ही मांग पत्र सौंपा जा सका है। शेष विधायकों को दो-तीन दिनों के भीतर मांग पत्र देने का निर्देश दिया गया है।


14 अप्रैल को जिला बैठक, 18 अप्रैल से धरना तय
संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि 14 अप्रैल 2026 को सभी जिलों में बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसके तहत 18 अप्रैल 2026 से मुख्यमंत्री आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। यदि 19 अप्रैल तक सरकार के साथ सम्मानजनक समझौता नहीं होता है, तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।


बड़े स्तर पर भागीदारी की तैयारी
आंदोलन को सफल बनाने के लिए राज्य कमेटी के सभी सदस्य आमरण अनशन पर बैठेंगे। साथ ही 18 और 19 अप्रैल को प्रत्येक प्रखंड से 5 और प्रत्येक जिला से न्यूनतम 20 नेतृत्वकारी सदस्य अनशन में शामिल होंगे। 20 और 21 अप्रैल को सभी सहायक अध्यापक दो दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर धरना स्थल पर पहुंचेंगे। इसके बाद भी आंदोलन जारी रहने की स्थिति में हर प्रखंड से 2 और हर जिला से कम से कम 10 शिक्षक अनशन में शामिल होंगे।


संसाधनों और व्यवस्था को लेकर निर्देश जारी
धरना स्थल पर दरी, पंडाल, कूलर, साउंड सिस्टम, रोशनी और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए कोष संग्रह की अपील की गई है। प्रत्येक प्रखंड कमेटी से 2000 रुपये और प्रत्येक जिला कमेटी से 5000 रुपये तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है। साथ ही महिला शिक्षकों के लिए पेयजल, शौचालय और रात्रि विश्राम की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


मांगें पूरी नहीं होने से बढ़ा आक्रोश
सहायक अध्यापकों का कहना है कि सरकार ने पूर्व में हुए समझौतों के बावजूद अब तक आकलन परीक्षा को टेट के समान मान्यता नहीं दी है और न ही अनुकंपा एवं वेतनमान के अनुरूप मानदेय पर कोई ठोस निर्णय लिया है। इससे करीब 40 हजार आकलन पास एवं प्रशिक्षित सहायक अध्यापकों में नाराजगी बढ़ गई है। आंदोलन को लेकर कहा गया है कि अब शिक्षकों का सब्र टूट चुका है और अपने अधिकारों के लिए यह निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।

क्या है मांगें
(1) समझौता के अनुरूप आकलन परीक्षा को टेट के समतुल्य मान्यता दी जाए । 
(2) आगामी प्रस्तावित टेट परीक्षा में सहायक अध्यापकों  के लिए बिहार राज्य के तर्ज पर कट ऑफ मार्क्स निर्धारित किया जाए एवं  प्रस्तावित टेट परीक्षा में संथाल परगना प्रमंडल के लिए क्षेत्रीय भाषा --- अंगिका एवं पलामू   प्रमंडल के लिए मगही भोजपुरी को शामिल किया जाए
(3) माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अनुबंधकर्मी का लाभ देते हुवे समान काम का समान वेतन का निर्धारण किया जाए 
(4) सहायक अध्यापकों की सेवानिवृत्ति उम्र 62 वर्ष की जाए

 

 

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