जामताड़ा
जामताड़ा जिले में इन दिनों तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। गर्मी ने न सिर्फ आम जनजीवन को बेहाल किया है, बल्कि बिजली विभाग के उपकरणों के पसीने छुड़ा दिए हैं। हालात यह हैं कि जो ट्रांसफार्मर लोगों के घरों तक बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाते हैं, वे इस भीषण गर्मी में खुद 'पानी मांग रहे' हैं। जामताड़ा मुख्य सब-स्टेशन का भी यही हाल है।

ट्रांसफार्मर को ठंडा रखने की अनोखी कवायद
तकनीकी कर्मचारियों के अनुसार, निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए ट्रांसफार्मर का तापमान 40 से 60 डिग्री के सुरक्षित दायरे में रखना अनिवार्य होता है। लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी के कारण यह सीमा पार होने का खतरा मंडरा रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत ट्रांसफार्मर की बॉडी और मुख्य रूप से उसके 'अर्थिंग' सिस्टम में लगातार पानी डाला जा रहा है।
वोल्टेज की समस्या से मिलेगी राहत
सब-स्टेशन कर्मियों ने बताया कि गर्मी में अर्थिंग सूखने से वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव (फ्लक्चुएशन) होने लगता है। अर्थिंग में पर्याप्त पानी देने से जहां एक तरफ ट्रांसफार्मर का तापमान नियंत्रित रहता है, वहीं दूसरी तरफ बिजली का वोल्टेज भी पूरी तरह स्थिर रहता है। विभाग हर साल गर्मी के मौसम में उपकरणों को ब्लास्ट और तकनीकी खराबी से बचाने के लिए इस तरह के सुरक्षात्मक कार्य करता है।
चार बड़े क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति दांव पर
गौरतलब है कि जामताड़ा सब-स्टेशन से कुल 6 फीडर निकलते हैं। यही फीडर जामताड़ा शहर, पी एचडी, गबरा और मिहिजाम शहर के हजारों उपभोक्ताओं को दिन-रात बिजली की आपूर्ति करते हैं। यदि एक भी ट्रांसफार्मर में खराबी आती है, तो इन इलाकों में पानी और बिजली का हाहाकार मच सकता है। यही कारण है कि विभाग मुस्तैदी से ट्रांसफार्मर की कूलिंग में जुटा हुआ है।