जामताड़ा
साइबर अपराध का एक नया और बेहद संवेदनशील तरीका सुर्खियों में है। इस बार शातिर अपराधियों ने लोगों को आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से डराकर जाल में फंसाना शुरू कर दिया है। ताजा मामला मिहिजाम थाना क्षेत्र का है, जहां नगर परिषद के वार्ड संख्या 19 के पार्षद कैलाश पंडित का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया है। हैकर्स ने पार्षद के व्हाट्सएप से हाथ की उंगली कटी हुई एक खौफनाक तस्वीर भेजकर उनके रिश्तेदारों और करीबियों से मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर तत्काल पैसों की मांग शुरू कर दी है। इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है, वहीं पार्षद ने जनता से किसी भी झांसे में न आने की अपील की है। 
मामला क्या है आइए जाने
शातिर साइबर अपराधियों ने मिहिजाम के पार्षद कैलाश पंडित के नाम और उनकी तस्वीर का दुरुपयोग करते हुए उनके करीबियों और रिश्तेदारों को ठगना शुरू कर दिया है। अपराधियों ने ठगी का एक बेहद संवेदनशील और डरावना तरीका अपनाया है। उन्होंने व्हाट्सएप पर पार्षद की प्रोफाइल फोटो लगा ली और फिर उनके परिचितों को हाथ की उंगली कटी हुई एक डरावनी तस्वीर भेजने लगे, ताकि उनके रिश्तेदार और शुभचिंतक डर जाएं। इस भावुक और डरावने जाल में फंसाकर हैकर्स परिजनों को मैसेज भेज रहे हैं और इलाज या अन्य बहानों से तत्काल पैसों की मांग कर रहे हैं।
आपातकाल का झांसा और फर्जी लिंक का जाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, साइबर अपराधी कभी किसी गंभीर दुर्घटना, मेडिकल इमरजेंसी या अचानक आए आर्थिक संकट का हवाला देकर तुरंत सहायता राशि ऑनलाइन ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे हैं। इसके अलावा, लोगों को झांसे में लेने के लिए किसी सरकारी जनहित योजना का फर्जी लिंक भी भेजा जा रहा है और उसे खोलने के लिए कहा जा रहा है। साइबर विशेषज्ञों और पुलिस के मुताबिक, ऐसे किसी भी संदेहास्पद लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल का पूरा डेटा, नेट बैंकिंग की जानकारी और अन्य निजी दस्तावेज चोरी होने का गंभीर खतरा रहता है।
पार्षद ने दर्ज कराई शिकायत, जनता से की अपील
पार्षद कैलाश पंडित को जैसे ही अपने नाम और तस्वीर का सहारा लेकर पैसे मांगे जाने की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत मिहिजाम थाना पुलिस को मामले की लिखित सूचना दे दी। इसके साथ ही उन्होंने आम नागरिकों और अपने परिचितों से भावुक न होने की अपील करते हुए कहा है कि उनके नाम या डीपी वाले नंबर से आने वाले किसी भी संदिग्ध मैसेज या लिंक पर बिल्कुल भरोसा न करें। अगर कोई भी आर्थिक लेन-देन करने से पहले सीधे उनके वास्तविक मोबाइल नंबर पर फोन करके सच्चाई जरूर जान लें। डिजिटल संदेशों के झांसे में आकर बिना पूरी पड़ताल के किसी को भी पैसे न भेजें। फिलहाल पुलिस साइबर सेल की मदद से मामले की तकनीकी जांच कर रही है, लेकिन इस सनसनीखेज घटना ने पूरे जिले में एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और साइबर सतर्कता को लेकर अलर्ट बढ़ा दिया है।