जामताड़ा
जामताड़ा उपायुक्त (DC) आलोक कुमार के कार्यालय प्रकोष्ठ में मंगलवार को जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस जनता दरबार में जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आए 50 से अधिक फरियादियों ने अपनी समस्याएं रखीं। वहीं उपायुक्त ने सभी मामलों को बेहद गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर इनके निष्पादन का सख्त निर्देश दिया। कई शिकायतों का मौके पर ही (ऑन द स्पॉट) निपटारा भी किया गया।
.jpeg)
रोजगार के लिए गुहार
जनता दरबार में नाला प्रखंड से अपनी मां के साथ आई पहाड़िया जनजाति की एक स्नातक उत्तीर्ण युवती ने रोजगार के लिए गुहार लगाई। उसने बताया कि वे चार भाई-बहन हैं, जिनमें से एक बहन दिव्यांग है। परिवार के भरण-पोषण के लिए उसे नौकरी की सख्त जरूरत है। उपायुक्त ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत जिला नियोजन पदाधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और युवती को भरोसा दिलाया कि उसे जल्द ही रोजगार मुहैया कराया जाएगा। एक और मामला नाला प्रखंड का सामने आया जहां सूर्यापानी आंगनवाड़ी केंद्र के पिछले कई महीनों से बंद रहने की शिकायत पर डीसी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया कि यदि संबंधित सेविका काम करने में अक्षम है, तो उसे नियमानुसार चयनमुक्त कर नए सिरे से बहाली की जाए।

अवैध वसूली पर होगी कार्रवाई
नारायणपुर प्रखंड के एक युवक ने शिकायत की कि ओबीसी सर्टिफिकेट के ऑनलाइन आवेदन के लिए सीएससी (CSC) संचालक द्वारा तय दर से अधिक पैसों की मांग की जा रही है। उपायुक्त ने इस पर जांच के आदेश देते हुए चेतावनी दी कि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने वाले संचालकों पर सख्त कार्रवाई होगी। वहीं नारायणपुर प्रखंड के पबिया में लगने वाले साप्ताहिक हटिया स्थल पर अवैध कब्जे और पास ही स्थित एक धार्मिक स्थल के बगल में मीट/मुर्गा दुकान खोले जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी थी। ग्रामीणों की शिकायत पर उपायुक्त ने अंचल अधिकारी (CO) को तुरंत जांच और समुचित कार्रवाई का जिम्मा सौंपा। जनता दरबार में जमीन विवाद, मनरेगा मजदूरी, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, अबुआ व अंबेडकर आवास की किस्त, पेयजल संकट और 'मईया सम्मान योजना' से जुड़ी कई शिकायतें आईं। एक मूक-बधिर बच्ची के दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए डीसी ने परिजनों को सदर अस्पताल के कैंप में जाने की सलाह दी और सिविल सर्जन को निर्देशित किया। उपायुक्त आलोक कुमार ने अधिकारियों को कड़े लहजे में हिदायत दी कि आम जनता की समस्याओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि नियमों के तहत होने वाले कार्यों के लिए ग्रामीणों को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।