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जामताड़ा साइबर अपराध के गढ़ में खुद मजदूर बना महाठगी का शिकार, बिना कॉल-OTP के उड़ाए ₹61,000

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​जामताड़ा
साइबर अपराध के 'गढ़' के रूप में कुख्यात झारखंड का जामताड़ा जिला अब एक अजीबोगरीब और चिंताजनक स्थिति का गवाह बन रहा है। जिस इलाके से बैठकर शातिर ठग पूरे देश के लोगों के बैंक खाते खाली करते थे, अब वहीं का एक सीधा-साधा स्थानीय मजदूर खुद साइबर अपराधियों का शिकार बन गया है। मामला नारायणपुर थाना क्षेत्र के टोपाटॉड गांव का है, जहां मुंबई में खून-पसीना बहाकर कमाने वाले एक मजदूर के खाते से शातिरों ने बिना किसी फोन कॉल या OTP के ₹61,000 उड़ा लिए। अपराधियों ने PhonePe के जरिए महज दो दिनों के भीतर 13 बार में इस वारदात को अंजाम दिया, जिसके बाद पीड़ित के खाते में अब सिर्फ 10 रुपए बचे हैं। इस अनोखी ठगी ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन के भी होश उड़ा दिए हैं।

 
​न कॉल आया, न OTP दिया; फिर भी खाली हो गया खाता
​पीड़ित कमरुल अंसारी बैंक ऑफ इंडिया (नारायणपुर शाखा) के खाताधारक हैं। वे मुंबई की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके खाते में कुल ₹61,000 जमा थे। हैरानी की बात यह है कि कमरुल को न तो कोई संदिग्ध फोन कॉल आया और न ही उन्होंने किसी के साथ अपना OTP या बैंक विवरण साझा किया। इसके बावजूद, 29 और 30 मई की रात को करीब 2 बजे अपराधियों ने फोनपे (PhonePe) ऐप के जरिए उनके खाते में सेंध लगा दी। 
13 बार में साफ की पूरी रकम
​बैंक स्टेटमेंट से खुलासा हुआ है कि साइबर अपराधियों ने बेहद शातिर तरीके से पूरी रकम निकाली। उन्होंने ​5,000 रुपए के कुल 12 ट्रांजैक्शन किए। फिर अंत में ₹1,000 का एक और ट्रांजैक्शन किया। इस तरह से कुल 13 बार में ₹61,000 उड़ा लिए गए। अब कमरुल के खाते में मात्र ₹10 और 27 पैसे बचे हैं। पीड़ित ने बताया कि वह खुद भी ऑनलाइन लेनदेन के लिए फोनपे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अपराधियों ने उनके डिजिटल वॉलेट या बैंक अकाउंट तक पहुंच कैसे बनाई, यह उनके लिए बड़ी पहेली है। 
साइबर थाने में शिकायत, पुलिस ने शुरू की जांच 
​जब पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता चला, तो उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क किया। बैंक अधिकारियों ने उन्हें स्टेटमेंट सौंपते हुए साइबर पुलिस के पास जाने की सलाह दी। इस संबंध में साइबर थाना प्रभारी राजेश कुमार मंडल ने कहा कि "हमें शिकायत की लिखित अर्जी मिल चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक अनुसंधान पदाधिकारी IO नियुक्त कर दिया गया है। पुलिस फोनपे ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, बैंक रिकॉर्ड्स और अन्य तकनीकी इनपुट्स की गहराई से जांच कर रही है। 
चर्चा का विषय बनी घटना
​जामताड़ा का नाम आते ही लोगों के जेहन में देशव्यापी ऑनलाइन फ्रॉड की तस्वीरें घूमने लगती हैं। लेकिन इसी जिले के भीतर एक गरीब मजदूर का इस तरह ठगा जाना अब स्थानीय स्तर पर भारी चर्चा और चिंता का विषय बन गया है। यह घटना साबित करती है कि साइबर अपराधियों के निशाने पर अब कोई भी आ सकता है, चाहे वह डिजिटल सुरक्षा के केंद्र में ही क्यों न रह रहा हो।

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