जामताड़ा/झारखंड
जामताड़ा जिले की एक अदालत ने फर्जी बैंक अधिकारी बनकर साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए 3-3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। जिला जज प्रथम अजय कुमार श्रीवास्तव के न्यायालय ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। दोनों आरोपियों को IPC की धारा 419 और 420 के साथ-साथ IT एक्ट की धारा 66सी और 66डी के तहत सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के पार टोल निवासी माथुर मंडल और मोहम्मद सलीम मियां को दोषी पाया।

सजा का विवरण इस प्रकार है:
IPC की धारा 419, 420 के तहत 3 साल की कारावास और IT एक्ट की धारा 66सी और डी में भी 3 साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि अर्थदंड की राशि नहीं चुकाने पर उन्हें 1 साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। यह पूरा मामला साइबर थाना कांड संख्या 12/2018 के तहत दर्ज किया गया था। दरअसल यह घटना 6 अप्रैल 2018 की है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी गांव के पास से सटे पलाश के जंगल में बैठकर साइबर क्राइम की घटना को अंजाम दे रहे हैं। सूचना के सत्यापन के लिए जब पुलिस वहां पहुंची, तो आरोपी भागने लगे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को खदेड़कर पकड़ लिया।

कई कंपनियों के मोबाइल और फर्जी सिम कार्ड जब्त
गिरफ्तारी के बाद पुलिस को आरोपियों के पास से अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल और फर्जी सिम कार्ड मिले। तत्कालीन थाना प्रभारी गदुर उड़ाव द्वारा इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। दोनों पर चोरी के मोबाइल और फर्जी सिम का उपयोग करने के मामले भी सामने आया। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते थे और उनसे एटीएम का 16 अंकों का नंबर मांगकर ठग ले जाते थे। इसी मामले में सरकार की ओर से कुल 10 गवाहों का परीक्षण कराया गया, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह सख्त फैसला सुनाया।