जामताड़ा
जामताड़ा जिला पुलिस ने मिहिजाम थाना क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुके अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कामयाबी हासिल की है। जामताड़ा एसपी शंभू कुमार सिंह के कड़े निर्देश पर मिहिजाम पुलिस ने एक ऐसे शातिर अपराधी को दबोचा है, जो उम्र की दहलीज पर तो 'नाबालिग' है, लेकिन उसके कारनामे किसी खूंखार पेशेवर अपराधी से कम नहीं हैं। पुलिस ने आरोपी को अवैध आर्म्स, लूटे गए सामान और वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक के साथ धर दबोचा है। 
एक ही अपराधी और लूटकांड दर लूटकांड
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस शातिर अपराधी ने हाल ही में कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया था। बीती 3/4 मई 2026 की रात मिहिजाम थाना अंतर्गत ढेकीपाड़ा कब्रिस्तान के पास कर्माटांड़ के एक रेलकर्मी को हथियार के बल पर बंधक बनाकर लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया था। इस कांड में तीन अपराधी शामिल थे, जिसमें यह नाबालिग मुख्य भूमिका में था। 
महिला से दुस्साहसिक लूट
इसके ठीक बाद, 11 मई की रात अपराधियों ने पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन (70 नंबर स्ट्रीट) निवासी महिला कविता रेणु को अपना निशाना बनाया। इस दुस्साहसिक वारदात में दो अपराधी शामिल थे, जिन्होंने महिला से नकदी और मोबाइल लूट लिए थे। मामले का खुलासा करते हुए जामताड़ा एसपी शंभू कुमार सिंह ने प्रेस को बताया कि मिहिजाम थाना प्रभारी प्रदीप राणा और उनकी टीम की तत्परता के बाद शहर डाल फिर से एक बड़ी वारदात का योजना बना रहे हैं निवासी 17 वर्षीय नाबालिग को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से निम्नलिखित सामान बरामद किया है।
हथियार: एक अवैध पिस्टल और जिंदा कारतूस।
वाहन: वारदात में इस्तेमाल की गई काले रंग की अपाचे मोटरसाइकिल।
लूटा गया सामान: पीड़िता का मोबाइल फोन और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से जलाए गए पर्स के अवशेष।
एसपी ने बताया कि चित्तरंजन कांड में 2 और ढेकीपाड़ा कांड में 3 आरोपी शामिल थे। पुलिस ने मुख्य नाबालिग आरोपी को दबोच लिया है, जबकि बाकी बचे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
2025 में युवक को मारकर किया था अपाहिज
तफ्तीश में इस नाबालिग का बेहद खौफनाक अतीत सामने आया है। इसने 6 मार्च 2025 को गिरफ्तार नाबालिक अपराधी ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर विनय यादव नाम के युवक पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस जानलेवा हमले में विनय यादव जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो गया।
कानून के संरक्षण का नाजायज फायदा
यह घटनाक्रम समाज के सामने एक कड़वा सवाल खड़ा करता है। उम्र की सीमा का नाजायज फायदा उठाकर ये सिरफिरे लड़के लगातार संगीन अपराध कर रहे हैं। ये जानते हैं कि 'नाबालिग' होने के कारण इन्हें जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का संरक्षण मिल जाएगा। समय आ गया है कि जब अपराध वयस्कों की तरह जघन्य हों, तो कानून को भी इन पर वयस्कों की तरह ही कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि समाज को भयमुक्त किया जा सके।