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थानेदार बन ठगी करने पहुंचे बदमाशों का पड़ा वरिष्ठ अधिवक्ता से पाला, पहचान बताते ही हुए नौ-दो-ग्यारह

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जमशेदपुर

जमशेदपुर में इन दिनों कुछ ठग पुलिस की वर्दी के नाम पर लोगों को डराने और गहने उतरवाने का खेल खेल रहे हैं। लेकिन, शुक्रवार को मानगो में उनकी यह चाल उस वक्त उलटी पड़ गयी, जब सामने कोई डरा-सहमा राहगीर नहीं, बल्कि कानून की बारीकियों को समझने वाला वरिष्ठ अधिवक्ता खड़ा था। खुद को बड़ा बाबू बताकर रौब झाड़ने पहुंचे शातिरों ने जैसे ही डर का दांव चला, सामने से ऐसी पहचान मिली कि कुछ सेकेंड पहले तक रौब झाड़ रहे बदमाश बुलेट स्टार्ट कर मौके से भाग निकले। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर कोर्ट से काम खत्म कर वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह करीब सवा एक बजे अपनी बाइक से मानगो स्थित घर लौट रहे थे। इसी दौरान मानगो बस स्टैंड गोलचक्कर के पास एक बुलेट पर सवार दो युवक उनके पीछे लग गये। कुछ दूर तक पीछा करने के बाद मानगो पुल पर उन्होंने ओवरटेक कर अधिवक्ता को रोक लिया। माहौल ऐसा बनाया गया जैसे कोई बड़ी पुलिस कार्रवाई चल रही हो। दिलचस्प यह है कि कुछ ही दूरी पर असली यातायात पुलिस वाहनों की जांच में लगी थी और इधर नकली रौब की पूरी पटकथा तैयार थी।

इस बार स्क्रिप्ट उनके हिसाब से नहीं चली

बाइक चला रहे युवक ने पीछे बैठे व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए कहा ये हमारे बड़े बाबू हैं। इसके बाद पीछे बैठे तथाकथित इंस्पेक्टर ने आवाज में सख्ती घोलते हुए कहा कि आगे बड़ी हत्या हो गयी है। माहौल बहुत खराब है। सोने की चेन और अंगूठी उतारकर रख लीजिए, नहीं तो कुछ भी अनहोनी हो सकती है। शायद उन्हें लगा होगा कि सामने वाला बुजुर्ग बाकी मामलों की तरह घबरा जायेगा, जेवर उतार देगा और वे आगे बढ़ जायेंगे। लेकिन इस बार स्क्रिप्ट उनके हिसाब से नहीं चली। वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह ने बिना हड़बड़ाए जवाब दिया तुम शायद मुझे नहीं पहचानते मैं एक अधिवक्ता हूं और किसी से नहीं डरता। बस, इतना सुनते ही कुछ पल पहले तक कानून का डर बेच रहे दोनों युवकों की आवाज बैठ गयी। न कोई पूछताछ हुई, न कोई कार्रवाई। दोनों ने बुलेट घुमायी और मौके से ऐसे निकल गये जैसे पहचान का डर अचानक हत्या के डर से बड़ा हो गया हो। विद्या सिंह के अनुसार, पूरी घटना इतनी अचानक हुई कि पल भर के लिए वे भी हैरान रह गये। दोनों युवक लंबे-चौड़े कद के थे, रंग गोरा था और देखने में बिल्कुल पुलिसकर्मियों जैसे लग रहे थे।

डर आधारित ठगी 

यही वजह है कि पहली नजर में आम लोग आसानी से भरोसा कर बैठते हैं। इधर, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई। साकची और बिष्टुपुर थाना पुलिस ने मानगो पुल, बस स्टैंड गोलचक्कर और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। बुलेट सवार संदिग्धों की तलाश जारी है। दरअसल, शहर में पिछले कुछ समय से यह “डर आधारित ठगी” लगातार बढ़ती दिख रही है। वर्दी का नाम, अपराध का भय और बुजुर्गों की सहज भरोसे वाली प्रवृत्ति इन्हीं तीन चीजों को हथियार बनाकर बड़ी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। हाल के मामलों पर नजर डालें तो 6 जून को बिष्टुपुर में बुजुर्ग महिला से पुलिसकर्मी बनकर करीब दो लाख रुपये के गहनों की ठगी की गयी। 5 मई को साकची बाजार में महिला को निशाना बनाए हुए साधु के वेश में ठगों ने सवा दो लाख के गहने उड़ा लिए। वहीं 3 मई को जुगसलाई में पुलिस अधिकारी बनकर बुजुर्ग से करीब छह लाख के गहने लेकर बदमाश फरार हो गये। अब सवाल सिर्फ इतना ही नहीं कि ठग कौन हैं। सवाल यह भी है कि सड़क पर कोई “बड़ा बाबू” बनकर रोक दे तो लोग डरें या पहले उससे उसकी पहचान पूछें।

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