जमशेदपुर
कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बुनियादी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भीषण गर्मी और लू के बीच अस्पताल में पानी का संकट गहरा गया है, जिससे मरीज, उनके परिजन और मेडिकल छात्र बेहद परेशान हैं। हालात इतने खराब हैं कि सेंट्रलाइज्ड एसी ठप होने, डीप बोरिंग सूखने और इमरजेंसी वार्ड में बेड कम पड़ने के कारण गंभीर मरीजों का इलाज फर्श और बरामदे पर करना पड़ रहा है। पानी की भारी किल्लत की वजह से डॉक्टरों को ऑपरेशन तक टालने पड़ रहे हैं। इस संकट को दूर करने वाली 400 करोड़ रुपये की पाइपलाइन जलापूर्ति योजना अप्रैल 2026 की अपनी समयसीमा को पार कर चुकी है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन ने अब ठेकेदार को 15 जून तक काम पूरा करने की आखिरी चेतावनी दी है, ऐसा न होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 
400 करोड़ का हाईटेक ढांचा, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते मरीज
मानगो के डिमना में 400 करोड़ की लागत से खड़ी हाईटेक अस्पताल बिल्डिंग के भीतर बुनियादी जरूरतें बिखरती नजर आ रही हैं। जिस परिसर को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का केंद्र माना गया था, वहीं पानी जैसी मूलभूत व्यवस्था अब सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। दरअसल, भीषण गर्मी ने हालात और बिगाड़ दिये हैं। कई बार अस्पताल की सेंट्रलाइज एसी प्रणाली भी जवाब दे देती है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को असहनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अब यही संकट मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल तक पहुंच चुका है, जहां पानी की किल्लत छात्रों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को पेयजल सहित अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान स्थिति में अस्पताल के वार्डों के साथ-साथ कॉलेज भवन और मेडिकल छात्र-छात्राओं के छात्रावास तक में पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे मरीजों और मेडिकल छात्रों के बीच त्राहिमाम की स्थिति बनी हुई है।
फर्श और बरामदे पर इलाज, हाथ पंखों के भरोसे परिजन
बरहाल, अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को प्यास बुझाने और दैनिक जरूरतों के लिए बाहर से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। पूरे कोल्हान से आने वाले मरीजों का दबाव इमरजेंसी वार्ड पर सबसे ज्यादा है, जहां बेड की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में इमरजेंसी का हाल सबसे खराब है। एक तो गर्मी, ऊपर से एसी नहीं चल रही है और बेड के अभाव में गंभीर मरीजों की परेशानी और बढ़ गयी है। मरीज फर्श और बरामदे पर इलाज के लिए मजबूर हैं, जबकि कई को घंटों स्ट्रेचर या कुर्सी पर रखकर स्लाइन चढ़ायी जा रही है। गर्मी से राहत पाने के लिए मरीजों के परिजन हाथ पंखों से काम चला रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड में लगभग 30 बेड की क्षमता है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच अतिरिक्त स्ट्रेचर लगाकर व्यवस्था संभालने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद हालात हर दिन और चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 10 अतिरिक्त स्ट्रेचर लगाये गये हैं।
नगर निगम के टैंकर नाकाफी, टालने पड़ रहे हैं ऑपरेशन
दूसरी ओर, स्थिति को संभालने के लिए मानगो नगर निगम की ओर से रोजाना लगभग 15 टैंकर पानी भेजा जा रहा है, लेकिन मांग के मुकाबले यह व्यवस्था नाकाफी है। इससे पहले 8 से 10 टैंकर पानी की सप्लाई हो रही थी, जिससे मरीजों और मेडिकल छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में पिछले दिनों पानी की कमी के कारण कई बार डॉक्टरों को ऑपरेशन तक टालना पड़ा। यह साबित करता है कि भीषण गर्मी में अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था इस दबाव को झेल नहीं पा रही है।.jpeg)
सातों डीप बोरिंग हुए फेल, 30% तक बढ़ी पानी की मांग
इधर, hospital परिसर में मौजूद सात डीप बोरिंग भी गर्मी की मार नहीं झेल पाये। कई बोरिंग सूख चुके हैं, जिससे वैकल्पिक स्रोत भी कमजोर पड़ गये हैं। बढ़ते तापमान और मरीजों की भीड़ के बीच पानी की मांग 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गयी है, लेकिन सप्लाई उसी अनुपात में नहीं हो पा रही है। इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर लगातार बढ़ते मरीजों का दबाव झेल रहे हैं। वहीं, हीटवेव से प्रभावित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इनमें दस्त, उल्टी, बुखार और पेट दर्द के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जगह कम पड़ने के कारण बरामदे में अतिरिक्त बेड और स्ट्रेचर लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इस भीषण गर्मी में पूरा अस्पताल परिसर एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां तकनीकी ढांचे के बीच बुनियादी सुविधाएं पीछे छूट गयी हैं। इलाज जारी है, लेकिन व्यवस्था हर दिन एक नई परीक्षा दे रही है।.jpeg)
पाइपलाइन प्रोजेक्ट की डेडलाइन फेल, प्रशासन की सख्त चेतावनी
गौरतलब है कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पाइपलाइन से जलापूर्ति की योजना अप्रैल 2026 तक पूरी होनी थी, जिससे उम्मीद थी कि भीषण गर्मी में मरीजों, परिजनों और अस्पताल कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन, डेडलाइन फेल हो गयी और अब इस व्यवस्था के शुरू होने में लगभग दो महीने और लगेंगे। प्रशासन ने योजना पूरी करने के लिए संवेदक को 15 जून का डेडलाइन दिया है, नहीं तो कानूनी कार्रवाई की चेतावनी तक दे डाली है। योजना पूरी होने पर एमजीएम अस्पताल को प्रतिदिन करीब 30 लाख लीटर पानी मिलने की संभावना है, जिससे पूरे परिसर की जलापूर्ति व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। इस मामले पर डीसी राजीव रंजन ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्राचार्य, अधीक्षक और सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की है। उन्होंने माना कि पाइपलाइन परियोजना में देरी के कारण अस्पताल में पानी का संकट गहरा गया है। साथ ही गर्मी के कारण जलस्तर नीचे चले जाने से नलकूप भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं। डीसी ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर काम पूरा नहीं होने पर संवेदक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी।