द फॉलोअप डेस्क
झारखंड सरकार के उस फैसले पर सियासत तेज हो गई है, जिसमें 12 पंचायतों से कम वाले प्रखंड में अब या तो बीडीओ रहेंगे या सीओ। डुमरी विधायक जयराम महतो ने इस निर्णय का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित एक लंबा संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि बीडीओ और सीओ के पद कम करने से राज्य का कोई विशेष वित्तीय लाभ नहीं होगा, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था और रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। जयराम महतो ने अपने पोस्ट में लिखा कि यदि पैसा बचाना है तो प्रशासनिक पदों में कटौती करने के बजाय मंत्रियों और वीआईपी की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों की संख्या घटानी चाहिए। उनका कहना है कि राज्य में कई वीआईपी को जरूरत से ज्यादा सुरक्षा दी गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को एसीबी जैसी एजेंसियों में लगाया जाए, ताकि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच तेज हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि वीआईपी जब कहीं आते हैं तो है लगता है की कोई राजा आ गए है।
माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, ये सब बीडीओ और सीओ का पद घटाने से राज्य का कुछ भला नहीं होने वाला है। पैसा बचाना है तो मंत्री/अनेक वीआईपी सुरक्षा के नाम पर अनगिनत सुरक्षाकर्मी की संख्या घटाइए। बदलाव सिस्टम में करना होगा महोदय।
— Jairam Kumar Mahato MLA (@Tigerjairam) July 3, 2026
ACB की जाँच कभी ख़त्म नहीं होती। उन… pic.twitter.com/PLegE7dQUi

नियुक्ति प्रक्रिया और रोजगार को लेकर भी उठाए सवाल
विधायक ने सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कोई तय नियुक्ति कैलेंडर लागू नहीं है और जेपीएससी तथा जेएसएससी के माध्यम से समय पर बहालियां नहीं हो रही हैं। उन्होंने आयोगों में अधिकारियों की संख्या बढ़ाने और सभी नियुक्तियां तय समय-सीमा के भीतर पूरी करने की मांग की। जयराम महतो ने कहा कि सरकार के फैसले से बीडीओ और सीओ स्तर के 107 पद कम हो जाएंगे, जिससे युवाओं के रोजगार के अवसर घटेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी देने की जरूरत है, न कि पद कम करने की। उन्होंने एक कहावत का जिक्र करते हुए लिखा, "सोना लूटा रहा है और कोयला पर छापेमारी।"

अधिकारियों पर भी साधा निशाना
जयराम महतो ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि सरकार के कुछ अधिकारी वास्तविक स्थिति से सरकार को अवगत कराने के बजाय गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने और युवाओं का भरोसा कायम रखने की अपील की। गौरतलब है कि राज्य मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जिन प्रखंडों में 12 से कम पंचायतें हैं, वहां बीडीओ और सीओ के अलग-अलग पद नहीं रहेंगे और एक ही अधिकारी दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा।