logo

JSSC : मुश्किल होगा उत्पाद सिपाही परीक्षा के गिरफ्तार 159 अभ्यर्थियों को अगली परीक्षा से डिबार करना

JSSC116.jpg

द फॉलोअप, रांची
पुलिस ने रड़गांव थाना क्षेत्र से 11 अप्रैल की रात जेएसएससी द्वारा 12 अप्रैल को ली जानेवाली उत्पाद सिपाही की प्रतियोगिता परीक्षा के 159 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा सॉल्वर गैंग के 5 आरोपियों और दो ड्राइवरों को भी गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी की वजह से 159 अभ्यर्थी 12 अप्रैल को राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित हुई प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। अब सवाल उठता है कि वे जेएसएससी द्वारा ली जानेवाली अगली किसी प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम 2023 के अनुसार इन अभ्यर्थियों को अगली प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल होने से तब तक डिबार करना जेएसएससी के लिए मुश्किल होगा जब तक इनके विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दायर नहीं हो जाता।


अधिनियम के प्रावधान
यहां मालूम हो कि राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में होनेवाले भ्रष्टाचार, प्रश्न पत्र लीक प्रकरण और अन्य तरह के कदाचारों पर रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 2023 में झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम 2023 का गठन किया था। 29 नवंबर 2023 को इसका गजट प्रकाशन किया गया। इस अधिनियम ने अलग अलग तरह के कदाचार, भ्रष्टाचार, अनुचित साधनों का प्रयोगों की विस्तार से चर्चा है। इसके लिए अलग अलग दंड के भी प्रावधान हैं। लेकिन किसी व्यक्ति के संबंध में अधिनियम कहता है-प्रश्न पत्र की कॉपी या लीकेज या लीकेज का षडयंत्र करने वाले दोषी होंगे। अप्राधिकृत(अनॉथराइज्ड) रीति से प्रश्न पत्र प्राप्त करना या प्राप्त करने का प्रयास करनेवाला भी दोषी माना जाएगा। इसी तरह से अप्राधिकृत तरीके से प्रस्न पत्र को हल करना या हल करने का प्रयास करना या प्रश्न पत्र हल करने में सहायता करनेवाला भी दोषी होगा। इसके अलावा अप्राधिकृत तरीके से प्रतियोगी परीक्षा में परीक्षार्थियों की प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करनेवाला भी दंडित होगा। लेकिन ऐसे परीक्षार्थियों को संबंधित नियुक्ति एजेंसी द्वारा डिबार करने की शर्तें भी दी गयी है। उसमें कहा गया है कि कोई परीक्षार्थी जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी अपराध के लिए अभियोजित (चार्जशिटेड) किया जाता है, उस तिथि से आरोपी परीक्षार्थियों दो से पांच साल तक परीक्षा से डिबार किया जा सकता है। हां संबंधित आरोप में अगर वह परीक्षार्थी अदालत से दंडित हो जाता है तो उसे 10वर्ष तक के लिए डिबार किया जा सकता है। फिर दुबारा चार्जशिटेड होने पर डिबार की अवधि बढ़ कर 5 से 10 वर्ष हो जाएगी और दुबारा दोष सिद्ध होने पर डिबार की अवधि आजीवन हो सकता है। इसलिए गिरफ्तार किए गए 159 अभ्यर्थियों के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट होने तक इन्हें डिबार किया जाना जेएसएससी के लिए मुश्किल होगा।


सॉल्वर गैंग के लिए इस अधिनियम में अलग प्रावधान हैं
परीक्षाओं एवं परीक्षाओं से संबंधित प्रश्न पत्रों एवं उत्तर पत्रकों के संबंध में झूठी, भ्रामक एवं मिथ्या सूचना देना तथा शिकायतों को प्रसारित या प्रकाशित करनेवाला प्रबंध तंत्र, संस्था या व्यक्ति दोषी समझा जाएगा। यदि कोई व्यक्ति संगठित अपराध में परीक्षा प्राधिकार के साथ षडयंत्र करता है या अनुचित साधनों में संलिप्त होता है या अधिनियम के किसी उपबंध का उल्लंघन करता है या उल्लंघन के लिए उत्प्रेरित करता है तो उसे 10 वर्ष तक आजीवन कारावास की सजा और दो करोड़ से 10 करोड़ तक जुर्माना हो सकता है। इसलिए सॉल्वर गैंग को दोषी ठहराने के लिए पुलिस को आवश्यक तथ्यों को अदालत में प्रस्तुत करना होगा।


 

Tags - Jharkhand JSSC excise constable exam candidates 159 arrested debarred