द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग जिले के दारू वन क्षेत्र के गाडीसाडम जंगल से एक संवेदनशील और दुर्लभ वन्यजीव की खबर सामने आई है। जंगल में एक घायल लकड़बग्घा पड़ा मिला, जिसे ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए देखा और फिर वन विभाग को सूचित किया। वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर घायल जानवर को सुरक्षित रेस्क्यू किया।.jpg)
हजारीबाग के गाडीसाडम जंगल जहां ग्रामीणों की नजर एक अजीब स्थिति में पड़े घायल लकड़बग्घा पर पड़ी। जब पास जाकर देखा गया तो पाया कि उसका जबड़ा बुरी तरह से जख्मी था और वह अचेत अवस्था में पड़ा हुआ था।
ग्रामीणों ने उसके शरीर और मुंह में पानी डाला, जिससे थोड़ी देर में लकड़बग्घा उठने की कोशिश करने लगा, लेकिन कुछ ही दूर जाकर बैठ गया। इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दी।
वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल लकड़बग्घा को सावधानीपूर्वक पिंजड़े में कैद कर अपने साथ इलाज के लिए ले गई।
पर्यावरणविद् मुरारी सिंह बताते हैं कि"लकड़बग्घा एक बहुत ही दुर्लभ और पर्यावरण के लिए जरूरी जीव है। यह इंसानों पर हमला नहीं करता, बल्कि जंगल में मरे हुए जीवों को खाकर सफाई करता है। पूरी दुनिया में इसकी संख्या लगभग 10 हजार ही बची है। संभवतः यह जानवर ग्रामीणों द्वारा जंगली सूअर के लिए लगाए गए विस्फोटक की चपेट में आ गया होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर संकेत हैं कि शिकार के लिए लगाए गए जाल और विस्फोटक कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं न सिर्फ शिकार के लिए, बल्कि उन मासूम जीवों के लिए भी जो जंगल की सफाई व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं।
वन विभाग की तत्परता और ग्रामीणों की जागरूकता ने एक दुर्लभ वन्यजीव की जान बचा ली। लेकिन यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि शिकार के लिए अपनाए जा रहे खतरनाक उपायों पर अब रोक लगाना कितना जरूरी हो गया है।