रांची
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की के मोरहाबादी स्थित आवास पर झारखंडी और सांस्कृतिक कलाकारों की एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में राज्य भर के जाने-माने कलाकारों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए तिर्की ने कहा कि झारखंड के कलाकारों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उनकी कला को उचित मंच और दिशा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से जल्द ही एक राज्य स्तरीय कला एकेडमी के गठन की मांग की जाएगी, ताकि कलाकारों को न सिर्फ पहचान मिले, बल्कि उनके हुनर को विकसित करने का अवसर भी मिले।

उन्होंने घोषणा की कि राज्य के सभी 24 जिलों से कलाकारों के सम्मान में एक विशाल समागम आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य झारखंडी कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाना और कलाकारों को सम्मान देना होगा।
बंधु तिर्की ने कहा, "झारखंड का गीत-संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्र और सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान है। आज कलाकार तंगहाली में जीवन जीने को मजबूर हैं। हमें उन्हें सिर्फ तालियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनके लिए रोज़गार के अवसर भी सृजित करने होंगे।"

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के कलाकारों के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित एक स्मृति ग्रंथ (सोवेनियर) प्रकाशित किया जाएगा, जो उनके योगदान को दस्तावेज़ी स्वरूप देगा। इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य डॉ. एम. तौसीफ, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मंजूर अहमद अंसारी, निरंजन पासवान और खुर्शीद हसन रूमी ने भी कलाकारों को संबोधित किया।
बैठक में राज्य के कई चर्चित कलाकार मौजूद थे, जिनमें पवन कुमार राय, पंकज कुमार, रमेश गुप्ता, भूषण मुंडू, वर्षा लकड़ा, पूजा मुंडा, रूपेश गुप्ता, अंजली देवी, ज्योति मिंज और सुनैना कच्छप शामिल थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों की उपस्थिति रही।
