द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मी को नियमित करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के आलोक में झारखंड सरकार ने इसकी पहल की है। इसको लेकर वित्त विभाग ने झारखंड के सभी 60 विभागों के विभागाध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत कार्य कर रहे कर्मचारियों की सूची शीघ्र मांगी है।

फॉर्मेट तैयार कर विभागों को भेजा गया
सभी विभागों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त कर्मियों की डिटेल जानकारी जुटाने को लेकर वित्त विभाग ने एक फॉर्मेट तैयार किया है। इस फॉर्मेट को सभी विभागों को भेज दिया गया है। इसमें कर्मी का पदनाम, कर्मियों की संख्या, कार्यरत अवधि, मासिक परिलब्धि, बाह्य स्रोत के आधार पर सेवा प्राप्त करने के निमित पद सृजित है अथवा नहीं, यदि स्थायी रूप से रखने की आवश्यकता है तो विभागीय आवश्यकता आधारित पदों की संख्या का ब्योरा आदि मांगा गया है।

31 हजार से अधिक कर्मियों को होगा सीधा फायदा
आउटसोर्सिंग कर्मियों को नियमित करने की पहल के पहले चरण में कम से कम 31801 कर्मचारियों को सीधा फायदा होना बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार विभिन्न विभागों में 31801 कर्मी वर्तमान में कार्यरत हैं। अगर सबकुछ सही रहता है तो नियमित नियुक्ति में इनके एक्सपीरियंस को देखते हुए सीधा लाभ हो सकता है।

विभिन्न पदों पर आउटसोर्सिंग से नियुक्त हैं कर्मी
राज्य के विभिन्न विभागों में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा इंट्री ऑपरेटर सहायक प्रोग्रामर, अमीन आदेशपाल, चालक, सफाई कर्मी आदि प्रतिनियुक्त हैं। ऐसे सभी कर्मियों का पूरा डिटेल वित्त विभाग ने मांगा है।

… तो संभवत: पहला राज्य होगा झारखंड
आउसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किए गए कर्मियों को नियमित करने की पहल हो रही है। अगर सबकुछ सही रहा और झारखंड के विभिन्न विभागो में कार्यरत 31 हजार से अधिक आऊटसोर्सिंग कर्मियों की नियमित किया जाता है तो संभवत: झारखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा।
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