द फॉलोअप डेस्क
रांची के मोरहाबादी मैदान में चले रहे पर्यावरण मेले के आठवें दिन ‘‘रिसाईक्लिंग एंड सस्टेनबिलिटी’’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। जिसमें रिसाइकिलिंग एंड इन्वायरमेंट इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव सह महानिदेशक राजेंद्र पी. शर्मा ने कहा कि विकास के फेर में हम अपने मूल सिद्धान्तों को भूल गए हैं। अगर हम लोग अपनी लाइफ स्टाइल को नहीं बदलेंगे तो आने वाले दिनों में दिक्कतें ज्यादा बढ़ जाएंगी। हमें अपनी जरूरतों को कम करना होगा। उन्होंने थ्री आर यानि रिड्यूस, रियूज और रिसाईकल का फॉर्मूला दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हमें जो भी संसाधन दिए हैं, उन सभी की एक सीमा है। एक सीमा के बाद वो खत्म हो जाएंगे। फिर क्या बचेगा हमारे पास, इस पर अब सोचने का वक्त आ गया है।

हरित क्रांति के काफी फायदे हुए थे
परिचर्चा के मुख्य अतिथि एवं बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, डॉ. (प्रो.) ओ.एन. सिंह ने कहा कि हरित क्रांति के काफी फायदे हुए थे। भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो गया था। मगर इसका दूरगामी प्रभाव भी पड़ा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आज पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। डीप बोरिंग फेल हो गए है। फर्टिलाईजर, यूरिया एवं पेस्टिसाईड के अत्यधिक प्रयोग से वहां के खेत लगभग बंजर हो गए हैं। हमें ऐसे फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देना होगा, जिनमें पानी का उपयोग न्यूनतम होता है। पंजाब, हरियाणा में जो पराली जलता है तो उसका धुआं दिल्ली तक पहुंचकर वहां के लोगों के स्वास्थ्य पर असर डालता है। हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। झारखंड में और राज्यों की तुलना में पर्यावरण और प्रकृति की स्थिति काफी बेहतर है, हमें इसे यथावत् रखने की आवश्यकता है। आज हमें वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करना होगा। पानी का उपयोग न्यूनतम करना होगा, उसकी बर्बादी को हर हाल में रोकना होगा तभी हमारी पृथ्वी बच पाएगी।

मेला में प्रवेश निःशुल्क होने से खूब रही चहल-पहल
मेला में प्रवेश शुल्क नहीं लिए जाने से खूब चहल-पहल रही। यहां कस्तूरबा खादी ग्रामोद्योग संस्थान, मुरी, खादी ग्रामोद्योग संस्थान, धनबाद, आदिम जाति समग्र विकास परिषद, रांची, खादी ग्रामोद्योग संस्थान, बिष्टुपुर एवं झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड जैसे नामचीन खादी स्टॉल लगाए गए हैं। कुटिर उद्योगों में मुख्य रूप से त्रिलोक जैन-चूरन वाला सहिल राजा, चूरन वाला अपने प्राकृतिक एवं स्वास्थ्यवर्द्धक उत्पाद बेच रहे है। यहां फर्नीचर से लेकर, खिलौने व बनारसी साड़ी आदि के भी स्टॉल लगाए गए हैं। वहीं, संध्या 6.30 बजे से मेले में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।
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