जामताड़ा:
साइबर क्राइम के लिए कुख्यात जामताड़ा जिले में ठगों ने आम जनता को चूना लगाने का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका खोज निकाला है। इस बार अपराधियों के निशाने पर ग्रामीण क्षेत्रों की आंगनबाड़ी सेविकाएं और उनके सरकारी रिकॉर्ड हैं। नारायणपुर प्रखंड के सिकदारडीह गांव से सामने आया यह मामला डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।

कैसे बुना गया ठगी का 'साइकोलॉजिकल जाल'?
मामले का खुलासा तब हुआ जब सिकदारडीह आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका ललिता देवी के मोबाइल (917782969376) पर एक अनजान कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को नारायणपुर ब्लॉक का डॉक्टर बताते हुए बेहद पेशेवर अंदाज में बात की। उसने दावा किया कि सरकार अब लाभार्थियों को सीधे बैंक खाते में भुगतान करने जा रही है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उसने सभी लाभार्थियों के बैंक अकाउंट नंबर,
मोबाइल नंबर और फोनपे/गूगल-पे का QR कोड तुरंत मांगा।
ठग ने ललिता देवी को झांसे में लेने के लिए गांव के ही 3-4 अन्य लोगों को कॉन्फ्रेंस कॉल पर जोड़ लिया। इस तरह का माहौल बनाकर उसने यह दिखाने की कोशिश की कि यह एक आधिकारिक और बेहद जरूरी सरकारी प्रक्रिया है।

डेटा लीक होने की बड़ी आशंका
इस घटना का सबसे डरावना पहलू यह था कि ठग के पास गांव की आंगनबाड़ी सेविकाओं के नंबरों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड, बच्चों की डिलीवरी डेट और राशन वितरण की सटीक जानकारी पहले से मौजूद थी। इसी सटीक डेटा के दम पर वह सेविका का भरोसा जीतने में कामयाब रहा। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि सरकारी तंत्र से कोई बड़ा डेटा लीक हुआ है, जिसके कारण यह संवेदनशील जानकारी अपराधियों तक पहुंची।

ललिता देवी की सूझबूझ से टली अनहोनी
हालांकि, ललिता देवी ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और ठग के दबाव में नहीं आईं। उन्होंने न सिर्फ जानकारी देने से मना किया, बल्कि तुरंत अन्य सेविकाओं को भी अलर्ट किया। ललिता देवी ने बताया कि सरकार कभी भी फोन पर बैंक टेल, QR कोड या UPI पिन नहीं मांगती। ऐसी किसी भी कॉल पर भरोसा न करें।
पुलिस और प्रशासन ने दी विशेष चेतावनी
घटना के बाद प्रखंड कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि विभाग फोन पर ऐसी कोई जानकारी नहीं मांगता। वहीं, जामताड़ा पुलिस ने जिले वासियों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर अपनी गोपनीय जानकारी साझा न करें। सतर्कता ही इस नए तरह के साइबर फ्रॉड से बचने का एकमात्र रास्ता है।