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गढ़वा में श्रद्धा और अकीदत के साथ मनाया गया मुहर्रम, मिथिलेश ठाकुर ने दिया भाईचारे का संदेश

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गढ़वा 
हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाने वाला मुहर्रम शुक्रवार को गढ़वा जिले में भी मनाया गया। विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सह झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश ठाकुर शामिल हुए। मोहर्रम इंतजामिया कमिटी चमरही व संग्रहे खुर्द की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शमिल हो कर मिथिलेश ठाकुर ने विभिन्न अखाड़ेदारों एवं करतब दिखलाने वालों को सम्मानित किया। इस दौरान कमेटी की ओर से पूर्व मंत्री को पुष्प गुच्छ एवं तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया। मौके पर मिथलेश ठाकुर ने कहा कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना और इस्लाम के चार सबसे पवित्र महीनों में से एक है। यह महीना पैगंबर मुहम्मद के नवासे, हजरत इमाम हसन, हुसैन और उनके साथियों की कर्बला में हुई शहादत की याद में शोक, त्याग और बलिदान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

उन्होने कहा कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने यज़ीद नाम के जालिम शासक की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। अपने परिवार और 72 साथियों के साथ, उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। मुहर्रम के दसवें दिन को 'आशूरा' कहा जाता है। यह दिन शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के लिए विशेष महत्व रखता है। श्री ठाकुर ने कहा कि भारत में मुहर्रम के दौरान लोग ताजिया (इमाम हुसैन के मकबरे की प्रतिकृति) निकालते हैं। जुलूसों में लोग अखाड़ों के माध्यम से लाठी, तलवार और भाले जैसे पारंपरिक हथियारों और शारीरिक करतबों का प्रदर्शन करते हैं। इस दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहती है। मौके पर मुख्य रूप से जिपस जैनुल्लाह अंसारी, बीडीसी लक्ष्मण पासवान, फुजैल अहमद, हाजी महमूद, ऐनुल, शेख अजीम, मो. आजाद खान, इकबाल, मुंद्रिका राम, रईस अंसारी,  शहजाद सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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