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कार्मिक विभाग ने तैयार किया संशोधन का प्रस्ताव, स्वीकृति मिली तो सचिवालय सेवा कर्मियों की प्रोन्नति होगी प्रभावित

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द फॉलोअप, रांची

कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा प्रोन्नति संबंधी संकल्प संख्या-3286, दिनांक 04.04.2014 में संशोधन की तैयारी किए जाने की चर्चा सचिवालय के गलियारों में तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, विभाग द्वारा तैयार एक प्रस्ताव में ऐसे संशोधन शामिल किए गए हैं, जिनका सबसे अधिक प्रभाव झारखंड सचिवालय सेवा पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि संकल्प संख्या-3286, दिनांक 04.04.2014 राज्य के विभिन्न सेवा संवर्गों में प्रोन्नति हेतु वेतनमान आधारित कालावधि में एकरूपता स्थापित करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। इसी संकल्प के आधार पर वर्षों से विभिन्न विभागों के सरकारी सेवकों को प्रोन्नति का लाभ मिलता रहा है।

प्रस्तावित संशोधन में एक विशेष वेतनमान वाले पद पर व्यतीत परिवीक्षा अवधि को प्रोन्नति हेतु आवश्यक सेवा अवधि में नहीं गिने जाने का प्रावधान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, संकल्प संख्या-3286 के स्थान पर संबंधित सेवा नियमावली में निर्धारित कालावधि को ही मान्य करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। जानकारों का कहना है कि यदि यह संशोधन लागू होता है, तो झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों को लेवल-7 से लेवल-8 के पद पर प्रोन्नति के लिए कम-से-कम 8 वर्ष की सेवा अवधि पूरी करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत संकल्प संख्या-3286 का लाभ प्राप्त करने वाले अन्य कई सेवा संवर्गों के अधिकारी इसी अवधि में लेवल-6 से सीधे लेवल-9 तक प्रोन्नत होने की स्थिति में रहेंगे। ऐसे में सचिवालय सेवा के अधिकारियों के साथ प्रोन्नति के अवसरों में असमानता उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

सूत्र यह भी बताते हैं कि प्रस्तावित संशोधनों का प्रभाव केवल सचिवालय सेवा तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अन्य सेवा संवर्गों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन संभावित प्रभावों का कोई समग्र अध्ययन या समीक्षा कार्मिक विभाग द्वारा की गई है या नहीं। सबसे बड़ा प्रश्न यह भी उठ रहा है कि आखिर ऐसे संशोधन लाने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई तथा इसके पीछे प्रशासनिक या नीतिगत औचित्य क्या है। इस संबंध में अब तक विभाग की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है। यदि प्रस्ताव वर्तमान स्वरूप में लागू किया जाता है, तो राज्य की प्रोन्नति व्यवस्था में वर्षों से लागू समानता के सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न खड़े हो सकते हैं। ऐसे में संबंधित सेवा संवर्गों के अधिकारियों की निगाहें अब कार्मिक विभाग के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।

Tags - Jharkhand Secretariat Promotion Personnel Amendment Proposal